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हेवीवेट पहलवानों को हराने की क्षमता है सुशील में

नईदिल्ली.बीजिंग ओलिंपिक में कांस्य पदक जीतने के साथ दिल्ली के पहलवान सुशील कुमार 66 किग्रा वर्ग में विश्व रैंक में तीसरे नंबर पर पहुंच गए हैं।

सुशील के कोच महाबली सतपाल ने आज यहां संवाददाताओं को बताया कि सुशील बीजिंग ओलिंपिक से पहले विश्व रैंक में छठे नंबर पर थे। सुशील ने ओलिंपिक में कांस्य पदक जीतने के अपने सफर के दौरान 45 मिनट में जो तीन कुश्तियां जीती थी उसमें उन्होंने अमेरिका के विश्व रैं¨कग के तीसरे नंबर के, बेलारूस के दूसरे नंबर के और कजाकिस्तान के चौथे नंबर के पहलवान को हराया था।

सतपाल ने कहा ‘‘अपने से रैंक में ऊपर के पहलवानों को हराने और कांस्य पदक जीतने के बाद सुशील अब विश्व रैं¨कग में तीसरे नंबर पर आ गए हैं जो भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।’

सतपाल ने कहा कि बीजिंग ओलिंपिक की सफलता से भारतीय कुश्ती के लिए नया रास्ता खुल गया। उन्होंने कहा..बीजिंग में हमने बहुत कुछ देखा और सीखा। हम उस सिलसिले को अब आगे बढ़ाना चाहेंगे।इस सफलता के बाद हमारे पास २क्१क् राष्ट्रमंडलीय खेलों में एडवांटेज की पोजीशन रहेगी और हम कुश्ती में ज्यादा से ज्यादा पदक जीत पाएंगे।

दंगल लड़ना है पसंद :

सतपाल ने कहा ‘सुशील ने बेशक ओलिंपिक में पदक जीत लिया है लेकिन वह अभी भी दंगल लड़ना चाहता है। उसकी यह सोच बिल्कुल सकारात्मक है क्योंकि वह जितने मुकाबले लड़ेगा उसका उसे ही फायदा मिलेगा।

२क्१२ ओलिंपिक में उसका गोल्ड तभी आ सकता है जब वह लगातार मुकाबले लड़ता रहे। यदि वह यह सोचकर मुकाबले नहीं लड़े कि कहीं वह हार गया तो क्या होगा। इसलिए बेहतर होगा कि वह मुकाबले लड़ता रहे। हार जीत किसी भी खिलाड़ी के जीवन में लगी रहती है चाहे वह ओलिंपिक चैंपियन ही क्यों न हो।’

हरा देते हैं हेवीवेट पहलवानों को :

सतपाल ने कहा ‘सुशील 66 किग्रा वर्ग में लड़ता है लेकिन वह अपने मुकाबलों में १क्क् किग्रा वर्ग तक के हैवीवेट पहलवानों को हरा देता है। यही बात उसकी खासयित है ’। उन्होंने साथ ही कहा कि ओलंपिक में जापानी पहलवान सुशील के मसल्स देखकर घबराते थे। उन्होंने बताया कि जब सुशील ने बीजिंग में कांस्य पदक जीता था तो सभी रेफरी और जज ने खुद आकर उसे बधाई दी थी।





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