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बिग-4 का क्या करेंगे वेंगसरकर

खेल डेस्क.श्रीलंका में भारतीय टेस्ट टीम की नाकामी और वनडे टीम की कामयाबी के बाद ‘टेस्ट टीम के चयन ’को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

कहा जा रहा है कि वनडे के कई सफल खिलाड़ियों को टेस्ट टीम में शामिल कर सीनियर्स की छुट्टी कर दी जाए। जाहिर है कि इन चर्चाओं से चयनकर्ताओं के लिए चयन की चुनौती बढ़ चुकी है। भारत को आगामी 9 अक्टूबर से भारत में ही ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 4 टेस्ट मैच खेलने हैं।

क्या ‘मुरझा’ गए हैं ‘पुराने चेहरे’ :

भारतीय बल्लेबाजी चौकड़ी (सचिन, सौरव, द्रविड़ और लक्ष्मण) सभी पिछले 10 या अधिक वर्र्षो से टीम के सदस्य हैं। इन सभी की उम्र 35 के आसपास है। बहरहाल टीम में शामिल होने का पैमाना उम्र नहीं है। इसलिए इन सभी के टेस्ट मैचों की पिछली 10 पारियों में प्रदर्शन पर नजर डालने पर (देंखें टेबिल) ज्ञात होगा कि उनका प्रदर्शन निराशाजनक है।

‘चौकड़ी’ ने ही दिलाई ‘घर के शेर’ की छवि से निजात :

पिछले कुछ वर्र्षो में टीम इंडिया की ‘घर के शेर’ की छवि टूटी है। भारत ने पिछले 10 टेस्ट o श्रृंखलाओं में चार (दो घरेलू और दो विदेशी) जीते। इनमें वेस्टइंडीज और इंग्लैंड में जीत शामिल हैं। हालांकि हमें 4 विदेशी सीरीज पाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा।

विदेशों में जीत दर्ज करने में इस चौकड़ी की भूमिका अहम रही है। बहरहाल पिछले दो सीरीज के प्रदर्शन को देखकर नए चेहरों की जरूरत भी महसूस की जाती रही है।

कितने तैयार हैं ‘युवा कंधे’ :

‘युवा कंधे’ यानि युवराज सिंह, रोहित शर्मा, सुरेश रैना, बद्रीनाथ, रॉबिन उथप्पा। सवाल यह है कि टेस्ट मैचों के लिए ये ‘युवा कंधे’ कितने तैयार हैं।

इसके लिए इनके वनडे की 10 पारियों पर नजर डालते हैं। जाहिर है प्रदर्शन के आधार पर टेस्ट टीम में आने के हकदार सिर्फ रैना नजर आते हैं।

टेस्ट टीम से बाहर कर दिए गए युवराज वनडे में भी संघर्ष कर रहे हैं। रोहित, बद्रीनाथ या रॉबिन उथप्पा का वनडे टीम में ही स्थान पक्का नहीं है। ऐसे में इनके कंधों पर टेस्ट टीम की जिम्मेदारी डालना जल्दबाजी हो सकती है।

चयनकर्ताओं की मुसीबत :

यदि चयनकर्ता सिर्फ प्रदर्शन को आधार बनाते हैं तो वे ‘पुराने चेहरे’ में से किसी को भी ‘आराम’ की सलाह दे सकते हैं। लेकिन सवाल यह है कि इनकी जगह टीम में खेलेगा कौन? क्योंकि ‘नए चेहरे’ हों या ‘पुराने चेहरे’, प्रदर्शन के पैमाने पर सब एक तौल उतरते हैं। टीम इंडिया के ‘नए और पुराने चेहरे’ के इस खेल में चयनकर्ता मुश्किल में फंस गए हैं।

टेस्ट की 10 पारियां

सचिन 13, 153, 13, 0, 27, 12, 5, 31, 6, 14

सौरव 0, 87, 87, 13*, 23, 4, 0, 16, 35, 18

राहुल 3, 17, 29, 18*, 14, 10, 2, 44, 10, 68

लक्ष्मण 39, 3, 35, 50, 56, 21, 39, 25, 61*

युवराज 8*, 19, 13, 169, 2, 0, 5, 12, 0, 32

वनडे की 10 पारियां

युवराज 48, 36*, 37, 36*, 0, 23, 20, 12, 0 17

सुरेश रैना 84, 116*, 1, 54, 16, 17, 1, 53, 76, 10

रोहित 0*, 22, 58, 22*, 3 19, 0, 32, 18, 3

रॉबिन उथप्पा 0*, 18, 10, 51, 11, 17, 30, 15*, 2, 20

बद्रीनाथ 27*, 6, 6(बद्रीनाथ ने अभी तीन वनडे मैच ही खेले हैं।)

क्या वरिष्ठ खिलाड़ियो को टेस्ट टीम से बाहर कर युवाओं को मौका देना चाहिए ? अपने विचार हमें लिख भेजें





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zoher bohra
Wednesday, 3rd Sep 2008, 12:02
salection commite 1 bar dhoni ki yuva team ko moka de kar dekhe mujhe aur sare bhartiya ki yehi ichha he. test team har to rahi hi he 1 bar muka inko dene me kya harz he aap inhe 1 moka de kar dekhiye mujhe vishvas he ye jaroor safal honge kam se kam drawid ganguli laxman ko to bahar nikal hi dena chahiye
j p saini
Wednesday, 3rd Sep 2008, 12:39
New players should be given chance to play in tests, like kohali, badrinath and suresh raina in place of rahul dravid, ganguly and laxman. Tendulkar should be included in coming test series against australia.