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.तो जान डाल देता इश्मीत के बुत में

लुधियाना. ‘अगर मुझे भगवान ने कोई ऐसी ताकत दी होती कि मैं किसी बुत में जान डाल सकता तो मैं इश्मीत को आज ही जीवित कर देता।’यह कहना है मूर्तिकार चंद्रशेखर प्रभाकर का। जिन्होंने प्रिय युवा गायक के जन्मदिन पर उसे श्रद्धांजलि देने के लिए मोम का आदमकद बुत बनाया है।

इस प्रतिमा को देखने पर यकीन ही नहीं होता कि इश्मीत सिंह आज इस दुनिया में नहीं है। लगता है जैसे माइक हाथ में लिए खड़ा इश्मीत बस अभी गीत गाने लगेगा। प्रतिमा बनाने में उनके कद, शक्ल, पहनावे का पूरा ध्यान रखा गया गया है। चन्द्रशेखर प्रभाकर के मुताबिक उन्होंने इस बुत का निर्माण अपनी कला के माध्यम से श्रद्धांजलि देने के लिए किया है। दो सितंबर 1989 को जन्मे इश्मीत की मालदीव में विगत 29 जुलाई को मृत्यु हो गई थी।

एक माह, 10 घंटे रोज

हू-ब-हू बुत बनाने में चंद्रशेखर को एक महीने का समय लगा है। उन्होंने प्रतिदिन आठ से 10 घंटे काम किया है।

गायकी न सही गायक ही सही

चंद्रशेखर ने बताया कि उन्हें बुत बनाने के साथ-साथ पेंटिंग और गाने का बहुत शौक था। वे गायकी का अपना शौक पूरा नहीं कर पाए, लेकिन इश्मीत सिंह में अपने शौक की झलक देखते थे। जब उन्होंने वायस ऑफ इंडिया का खिताब जीता तो उसका बुत बनाने की ठानी और सोचा कि इश्मीत को उसका बुत बनाकर देंगे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि उनकी मौत के बाद ही वे इस बुत को बना पाएंगे। वे इस बुत को इश्मीत के नाम पर बनने वाली एकेडमी में रखेंगे।





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