इंदौर. सांसद नारायण केसरी के बेटे प्रीतम और उनकी बेटी गायत्री किरण वर्मा के बीच हुए विवाद का खामियाजा मल्हारगंज पॉली क्लिनिक के स्टाफ व नसबंदी कराने आए 15 से ज्यादा लोगों को करीब डेढ़ घंटा बंधक बनकर भुगतना पड़ा।
नसबंदी कराने वाले व्यक्ति के प्रेरक को मिलने वाली 200 रु. की राशि विवाद का कारण बताया जा रहा है। पुलिस ने प्रीतम और उसकी पत्नी उषा के खिलाफ सरकारी कार्य में हस्तक्षेप करने का मामला दर्ज किया है।
मंगलवार दोपहर 3.15 बजे अस्पताल में कार्यरत गायत्री और प्रेरक के रूप में कार्य करने वाली उषा व उनके पति प्रीतम के बीच विवाद हुआ। विवाद हाथापाई तक पहुंच गया। जब यह विवाद चल ही रहा था तब डॉ. एल.एम. पंत नर्स संध्या पद्माकरण, कर्मचारी बी.आर. पाटिल व श्याम के साथ पुरुष नसबंदी ऑपरेशन कर रहे थे।
कुछ ही देर में अस्पताल के सभी दरवाजों पर ताले लगा दिए गए जिससे डॉ. पंत व उनके स्टाफ के अलावा नसबंदी के लिए पहुंचे 15 से ज्यादा लोग बंद हो गए। करीब डेढ़ घंटे बाद पुलिस पहुंची जिसने ताले खुलवाए। ताले लगाने के संबंध में भी दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं।
उषा का कहना है श्रीमती वर्मा ने पति गोपाल के साथ मिलकर अस्पताल के सभी दरवाजों पर ताले लगाए जबकि श्रीमती वर्मा ताले लगाने का आरोप प्रीतम पर लगा रही हैं। उषा का कहना है श्रीमती वर्मा मुझे प्रेरक के रूप में मिलने वाली राशि से जलती हैं जिससे आए दिन विवाद करती रहती हैं।
..और रो पड़े डॉ. पंत- घटना के दौरान हुए हो-हल्ले व बदतमीजी को देखकर डॉ. पंत रो पड़े। उनका कहना था मैं तो राष्ट्रीय कार्यक्रम को चला रहा हूं जिसमें सफलता भी मिल रही है। इस तरह के लड़ाई-झगड़ों से अस्पताल की बदनामी होगी और जो लोग नसबंदी कराने के लिए प्रेरित हो रहे हैं वे नहीं आएंगे। उधर, सिविल सर्जन डॉ. सतीश त्रिवेदी का कहना है हम मामले की छानबीन कर दोषी के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।