इंदौर.
‘चिट्ठी वाले गणोशजी’ के नाम से प्रसिद्ध जूना चिंतामण गणोशजी समय बदलने के साथ अब हाईटेक हो गए हैं। वे भक्तों के मोबाइल सुनकर उनके दु:ख दूर करते हैं और भगवान मनोकामनाएं भी पूरी करते हैं। देश-विदेश के कई लोग उनसे मन्नत भी मांगते हैं।
जूनी इंदौर स्थित प्राचीन गणोश मंदिर में प्रतिदिन सैकड़ों लोग दर्शन के लिए आते हैं, उत्सव और गणोश चतुर्थी पर श्रद्धालुओं की कतारें यहां लगती हैं। परमारकालीन इस मंदिर के भक्त देशभर में हैं। जो श्रद्धालु यहां नहीं आ सकते वे भगवान को चिट्ठी भेजकर समस्याएं या कष्ट बताते थे।
मंदिर के पुजारी पं. मनोहरलाल पाठक का कहना है भक्तों की चिट्ठियों को भगवान के सामने पढ़ते थे। देश ही नहीं जर्मनी, अमेरिका सहित अन्य विदेशी भक्तों की भी चिट्ठी आती हैं। मनोकामना पूरी होने के बाद श्रद्धा अनुसार भक्त पूजा करवाता या भेंट चढ़ाता है। उन्होंने कहा पहले चिट्ठियां आती थीं लेकिन समय बदलने के साथ अब भक्त अपने कष्ट भगवान को मोबाइल पर बताने लगे, इसके लिए दो मोबाइल रखे गए।
बाहर से जिस भी व्यक्ति का फोन आता और उसकी समस्या होती है, हम स्पीकर चालू कर गणोशजी के चरणों में मोबाइल रख देते और फिर व्यक्ति अपने कष्ट या मनोकामना बताता है। काफी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी हुईं और वे मंदिर में दर्शन करने आते हैं।
डेढ़ साल पहले हुई शुरुआत
पं. पाठक के मुताबिक करीब डेढ़ साल पहले एक भक्त का फोन आया और उसने अपने कष्ट बताए, इसके बाद धीरे-धीरे अन्य लोगों के। कोई भी भक्त यदि चाहे तो वह 9977966400, या 94250-74548 लगा सकता है, हम उसके दु:ख या मनोकामना भगवान को बताते हैं।
तीज-त्योहार पर बढ़ती है संख्या
>> मंदिर में आम दिनों में इक्का-दुक्का फोन आते हैं लेकिन तीज-त्योहार, उत्सव और गणोशोत्सव में रोजाना 8-10 फोन आते थे।
>> पं. पाठक के अनुसार शहर के व्यक्ति तो दर्शन के लिए आ सकते हैं, बाहर रहने वाले नहीं इसलिए मोबाइल से उनकी समस्याएं भगवान को बताते हैं।