जयपुर.
शहर गणपतिमय हो चुका है। बुधवार को भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी है, जिसे प्रतिवर्ष गणोश जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।
इस बार गणोशजी का वार बुधवार और गणोश चतुर्थी दोनों एक ही दिन होने का विशेष संयोग है, जिससे यह उत्सव श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस संयोग को देखते हुए शहर के सभी प्रमुख मंदिरों में विशेष साज-सज्जा की गई है और दर्शन के पुख्ता इंतजाम किए हैं।
गढ़गणोश मंदिर : जयपुर को बसाने से पहले सर्वप्रथम महाराज सवाई जयसिंह ने गणोश गढ़ की स्थापना की थी। माना जाता है कि पार्वती ने उबटन से जो गणोश आकृति बनाई, प्रतिमा का वही रूप है। सवाई जयसिंह सिटी पैलेस पर खड़े होकर दूरबीन से प्रतिदिन गढ़गणोश के दर्शन करते थे। मंदिर के महंत के अनुसार गणोश चतुर्थी पर बुधवार को सुबह गणपति का दुग्धाभिषेक और पंचामृत अभिषेक होगा।
मोतीडूंगरी गणोश मंदिर : संवत 1818 में मावली के नगर सेठ जयराम पालीवाल ने मोतीडूंगरी गणोश मंदिर की स्थापना की। यह प्रतिमा पौने सात फुट ऊंची और उत्तर भारत में सबसे बड़ी बैठी हुई गणोश मूर्ति है। साथ ही इसकी सूंड का झुकाव बाईं ओर है, जो समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। यह प्रतिमा महाराष्ट्र के सिद्धक्षेत्र से उदयपुर के मावली में आई। मावली जयपुर के तत्कालीन महाराज माधोसिंह प्रथम का ननिहाल था। राजपरिवार की सहायता से यह प्रतिमा जयपुर आई।
यहां बुधवार सुबह 4:45 बजे मंगला आरती के बाद विशेष पूजन सुबह 11:20 बजे, श्रंगार आरती दोपहर 12 बजे, भोग आरती दोपहर 2:30 बजे, संध्या आरती शाम 7 बजे तथा शयन आरती रात 11:30 बजे होगी। दोपहर 1 से 2 बजे तक भोग के लिए पट बंद रहेंगे। दर्शन के लिए महिला, पुरुषों तथा परिवार के लिए अलग-अलग व्यवस्था रहेगी। मोतीडूंगरी मार्ग व जवाहरलाल नेहरू मार्ग से दर्शन के लिए प्रवेश किया जा सकेगा।
नहर के गणोशजी का मंदिर : करीब 150 वर्ष पहले ब्रrापुरी की पहाड़ी के नीचे स्थापित इस मंदिर में गणोश प्रतिमा दक्षिण सूंड वाली और दक्षिण मुखी है। इसके अलावा सूरजपोल बाजार स्थित श्वेत सिद्धि विनायक मंदिर में गणोश प्रतिमा के दोनों ओर ऋद्धि-सिद्धि हैं। साथ ही चांदपोल बाहर परकोटे वाले गणोशजी, बंगाली बाबा आश्रम स्थित गणोशजी, खोले के हनुमान मंदिर में नृत्य गणोशजी, गंगापोल वाले गणोशजी, जयलालमुंशी का रास्ता स्थित पूर्णानंद गणोश मंदिर और गुप्त गणोशजी मंदिर में भी लोगों की काफी आस्था है।
लालडूंगरी गणोशजी मंदिर : गलता गेट से उत्तर में लाल पत्थर की पहाड़ी स्थित गणोश मंदिर अद्वैत परंपरा का प्राचीन स्थान है। यह करीब 465 वर्ष पुराना मंदिर है। जयपुर के पूर्व में होने से इसे शहर के लिए शुभ माना गया। महाराजा सवाई जयसिंह ने इस मंदिर का जीर्णोद्वार करवाया। यहां स्थापित गणोश प्रतिमा की ऊंचाई करीब साढ़े चार फीट है और उनकी सूंड चरणों तक लंबी है। यह आमेर विरासत का मंदिर है। यहां सुबह 6:15 बजे आरती के साथ ही पूजा-अर्चना शुरू हो जाएगी। दोपहर सवा 3 बजे महाआरती का आयोजन होगा।
अधिकतर मंदिरों में सुबह मंगला आरती के बाद नियमित आरती के बाद दूर्वा समर्पण, पंचामृत अभिषेक, मोदकों का भोग आदि कार्यक्रम होंगे व शाम को नियमित आरती के बाद रात 12 बजे शयन आरती होगी। बंगाली बाबा गणोश मंदिर में मंदिर में सुबह पंचामृत अभिषेक, फूल बंगला झांकी, स्तोत्र पाठ, मोदक अर्पण व सहस्रनाम पाठ के बीच दोपहर में आरती होगी। शाम को भजन संध्या होगी, जिसमें गायक हितेष डोवटीवाल व अन्य कलाकार प्रस्तुति देंगे।