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सिमटा इस्पात भूमि का काम

रायपुर. उरला और सितलरा क्षेत्र के उद्योगपतियों में इस्पात भूमि कंपनी को लेकर चला आ रहा विवाद अब खत्म हो गया। उरला औद्योगिक क्षेत्र को इस्पात भूमि कंपनी लिमिटेड से अलग कर दिया गया है। वहां डेवलपमेंट और रखरखाव का काम सीएसआईडीसी करेगा। इस्पात भूमि के जिम्मे केवल सिलतरा का विकास होगा।

राज्य औद्योगिक विकास निगम ने इसके आदेश पिछले दिनों जारी कर दिए हैं। आदेश के मुताबिक इस्पात भूमि कंपनी का काम सिलतरा क्षेत्र में सीमित रहेगा। लगभग 4000 एकड़ में वह विकास करेगा। उरला क्षेत्र का 1200 एकड़ हिस्सा अलग कर दिया गया है।

सूत्रों के अनुसार अब इस्पात भूमि में लगभग 90 उद्योग आएंगे। पहले इसमें उरला क्षेत्र के 450 छोटे व मध्यम उद्योग भी शामिल थे। दो साल में इस्पात भूमि कंपनी ने उरला में 2.76 करोड़ रुपए के काम कराए। अब उरला के अलग होने पर सीएसआईडीसी यह राशि इस्पात भूमि को लौटाएगा। उरला क्षेत्र के विकास व रखरखाव का पूरा जिम्मा पहले की तरह सीएसआईडीसी करेगा।

10 करोड़ वापस
इस्पात भूमि कंपनी का प्रोजेक्ट लगभग 60 करोड़ का था। इसमें से 38 करोड़ रुपए सिलतरा के लिए थे। उरला के लिए केंद्र ने लगभग 18 करोड़ का बजट रखा था। इसमें से 10 करोड़ रुपए मिले थे। यह राशि अब केंद्र को वापस लौटाई जाएगी।

क्या है इस्पात भूमि
उरला व सिलतरा क्षेत्र में औद्योगिक अधोसंरचना विकसित करने केंद्र सरकार ने इस्पात भूमि कंपनी का गठन किया है। इसमें केंद्र के साथ राज्य सरकार व कपंनी को भी अपना हिस्सा लगाना है। सीएसआईडीसी को इसकी नोडल एजेंसी बनाया गया है।

कंपनी अगले 20 साल तक क्षेत्र के विकास के लिए काम करेगी। वह उद्योगों से पानी और टोल के रूप में शुल्क लेगी। कंपनी में उद्योगपतियों को शेयर के आधार पर डायरेक्टर व सदस्य बनाया गया है। लेकिन इसमें उरला के उद्योगपतियों की भागीदारी नहीं थी।

झगड़े की मूल वजह यही माना जा रही थी। हालांकि उरला इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष जीके अग्रवाल का कहना है कि आम जरूरतों को दरकिनार कर कंपनी मनमर्जी से उन कामों पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही थी, जिसकी जरूरत ही नहीं, इसलिए उरला के उद्योगपतियों ने इसका विरोध किया।





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