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प्राचार्यों के लिए भी होमवर्क

रायपुर. शिक्षा विभाग के हेडक्वार्टर या डीईओ (जिला शिक्षा अधिकारी) को अब बार-बार स्कूलों से शिक्षकों के खाली पदों का ब्योरा नहीं मांगना पड़ेगा। बच्चों की कक्षावार दर्ज संख्या मांगने के लिए अर्जेट चिट्ठियां नहीं लिखनी होगी। अगले महीने से डीईओ में यह तमाम जानकारी आनलाइन हो जाएगी। हर महीने स्कूल के प्राचार्य खुद डीईओ आकर डेटा अपडेट कराएंगे।

डीईओ में जिलेभर के स्कूलों का रिकार्ड कंप्यूटर के साथ फोल्डर फाइल में भी दर्ज रहेगा। प्राचार्य को डीईओ में हाजिर होकर खुद फोल्डर फाइल निकलवानी होगी। वे स्कूल से जो ताजा जानकारी लेकर आएंगे, उसकी इंट्री उन्हें करनी पड़ेगी।

बच्चों की संख्या में आने वाले बदलाव का भी उसमें जिक्र किया जाएगा। शिक्षकों की संख्या या खाली पदों में कोई भी बदलाव आने पर उसका ब्योरा दर्ज किया जाएगा। फोल्डर फाइल में लिखने के बाद प्राचार्य कंप्यूटर में ताजा इंट्री करवाएंगे। कंप्यूटर के डेटा में फेरबदल करवाने की जिम्मेदारी भी प्राचार्र्यो की होगी। प्राचार्र्यो को सबकुछ अपने सामने करवाना पड़ेगा। यदि उन्होंने ऐसा नहीं किया और मांगने पर डेटा अपडेट नहीं मिला तो उनकी खैर नहीं होगी।

डीईओ के एक हिस्से में फोल्डर फाइल के लिए बाकायदा अलग से रैक तैयार की जाएगी। विकासखंड के हिसाब से स्कूलों की फोल्डर फाइल रैक में रखी जाएगी। प्रत्येक फाइल का एक कोड नंबर दिया जाएगा, जो एक तरह से पहचान का काम करेगा। कोड वर्ड के जरिये फोल्डर फाइल आसानी से तलाश किया जा सकेगा।

डीईओ सुश्री शैल शांडिल्य ने प्रत्येक सरकारी स्कूल के प्राचार्र्यो की बैठक लेकर उन्हें इस बारे में निर्देश दे दिए हैं। प्राचार्र्यो को स्पष्ट कर दिया गया है कि सबकुछ उन्हें ही करवाना है। इस जिम्मेदारी को पूरा न करने वाले प्राचार्र्यो के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। उनकी दो वेतन वृद्घि रोकने तक का निर्णय लिया जा सकता है।

पहली ही बैठक में फंसे
पं. जयनारायण पांडे स्मृति हायर सेकेंडरी स्कूल में सोमवार को धरसींवा ब्लाक के तमाम सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की बैठक थी। पहली ही बैठक में चार स्कूल के प्राचार्य नहीं पहुंचे। डीईओ ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

प्राचार्र्यो पर बढ़ा लोड
प्राचार्र्यो को शिक्षकों और विद्यार्थियों का ब्योरा डीईओ को देने के साथ-साथ मध्यान्ह भोजन, छात्रवृत्ति, गणवेश वितरण व साइकिल योजना का क्रियान्वयन कराना होगा। उन्हें नियमित इसकी जानकारी मुख्यालय और डीईओ को देनी होगी।

इसलिए पड़ी जरूरत
शिक्षा विभाग में बरसों बाद सेटअप मंजूर होने के बाद शिक्षकों के प्रमोशन और ट्रांसफर की बात सामने आई, तब पता चला कि रिकार्ड ही नहीं है। राज्य में कितने स्कूल हैं, इस जानकारी के अलावा शिक्षा मुख्यालय और डीईओ के पास कोई रिकार्ड नहीं है।

प्रत्येक स्कूल में कितने शिक्षक पढ़ा रहे हैं, उनमें स्वीकृत पद कितने हैं, कितने पद खाली हैं, यह जानकारी प्राप्त करने में ही अफसरों को महीनों लग गए। प्रमोशन करने के बाद पता चला कि जल्दबाजी में गलत जानकारी भेज दी गई थी। इस वजह से प्रमोशन पाने की पात्रता रखने वालों को फायदा नहीं मिला, उनके पीछे वाले पदोन्नत हो गए। इसीलिए जिला स्तर पर एक-एक स्कूल का रिकार्ड तैयार करवाया जा रहा है।





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