News
Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. जंगल को लोगों को उनका हक और शोषण से मुक्ति दिलाने के नाम पर लड़ रहे माओवादियों ने अचानक पैंतरा बदलते हुए कश्मीर की आजादी को समर्थन देने की घोषणा कर दी है।
हैदराबाद में सोमवार को जारी बयान में प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओ) ने अपने गुरिल्लाओं (पीएलजीए) से अपील की है कि राज्यों की सीमा से निकलकर कश्मीर जाएं और वहां के लड़ाकों का साथ दें। छत्तीसगढ़ की खुफिया पुलिस माओवादियों के इस बयान के बाद से सक्रिय हो गई है। डीजीपी विश्व रंजन ने कहा कि राज्य में माओवादियों की इस अपील के असर की समीक्षा की जाएगी।
सीपीआई (माओ) की सेंट्रल कमेटी का यह बयान अभी छत्तीसगढ़ पुलिस को नहीं मिला है, लेकिन इंटेलिजेंस ने मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से इसकी पुष्टि की है। छत्तीसगढ़ पुलिस ने आंध्रप्रदेश पुलिस से इस बारे में संपर्क भी किया है।
डीजीपी श्री रंजन ने बताया कि माओवादियों की राष्ट्रविरोधी तमाम ताकतों को सहयोग देने की रणनीति का खुलासा पहले ही हो चुका है। नक्सली साहित्य में कई जगह जिक्र है कि देश के जिस हिस्से में भी कथित आजादी की लड़ाई चल रही है, उसे माओवादियों का समर्थन है।
गौरतलब है, श्री रंजन इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के हार्डकोर अफसर रह चुके हैं। हैदराबाद और बस्तर से जो मीडिया रिपोर्ट्स मिल रही हैं, उनके अनुसार माओवादियों ने अपने बयान में साफ कर दिया है कि कश्मीर के लड़ाकों को रणनीति बदलनी होगी।
उनकी लड़ाई ऐसे आजाद कश्मीर के लिए होनी चाहिए तो न तो भारत के साथ हो और न ही पाकिस्तान के साथ। इसके पीछे नक्सलियों की क्या रणनीति हो सकती है, इसके कयास लगाए जाने लगे हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल के बाद नक्सली चाहते हैं कि कश्मीर की घाटी में उनकी घुसपैठ हो जाए ताकि इस दुर्गम इलाके का वे बाद में भरपूर इस्तेमाल कर सकें।
अलगाववाद उद्देश्य : कर्मा
नक्सल आंदोलन के खिलाफ अरसे से आंदोलन चला रहे छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा ने दो-टूक कहा कि माओवादियों ने ऐसा करके साबित किया है कि वे सिर्फ अलगाववाद के समर्थक हैं।
उन्होंने कहा कि नक्सली पृथकतावादी लोगों का साथ देकर नए इलाकों में पकड़ बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यह सिर्फ इसलिए किया जा रहा है, ताकि देश के और हिस्सों में उनकी तूती बोलने लगे। श्री कर्मा ने कहा कि पृथकतावाद को नक्सलियों का हवा देना कोई आश्चर्य का विषय नहीं है।
छग में सबूत नहीं
छत्तीसगढ़ की इंटेलिजेंस को अब तक ऐसी सूचनाएं नहीं मिली हैं कि यहां के नक्सली कश्मीर गए या वहां से आतंकवादी यहां आए। बस्तर के दुर्गम जंगलों में नक्सली ट्रेनिंग कैंप चला रहे हैं, लेकिन वहां प्रशिक्षण लेने या देने के लिए कश्मीरी उग्रवादियों के आने के संकेत नहीं मिले हैं।
कश्मीरी जिन हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं, यहां नक्सलियों के पास वैसे हथियार भी नहीं हैं। इंटेलिजेंस से जुड़े एक आला अफसर ने बताया कि आने वाले कुछ दिनों में नक्सलियों की यहां क्या गतिविधियां होंगी, इस पर नजर रखी जा रही है।