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हाथों-हाथ बिक गए 44 लाख के फार्म

बिलासपुर. form व्यावसायिक परीक्षा मंडल द्वारा आयोजित पटवारी चयन परीक्षा के आवेदन फार्म को लेकर मारामारी अब तक जारी है। मंगलवार तक मुख्य डाकघर व जरहाभाठा एसबीआर कालेज को मिलाकर 11 हजार 23 फार्म बिक चुके हैं। 4 सौ रुपए प्रति फार्म की दर से व्यापमं को इससे केवल शहर से 44 लाख 10 हजार रुपए की आमदनी हुई है।

व्यापमं द्वारा 21 सितंबर को आयोजित पटवारी चयन परीक्षा का फार्म खरीद लेना आवेदकों के लिए चुनौती साबित हो रहा है। विक्रय केंद्रों की कम संख्या व आवेदन फार्मो की सीमित उपलब्धता आवेदकों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। विक्रय केंद्रों में आवेदकों की लाइन कम ही नहीं हो रही है।

इस दौरान लड़कियों को भी फार्म लेने में प्राथमिकता नहीं दी जा रही है। ऐसी स्थिति में लड़कियां भी लड़कों के साथ लाइन में घंटों खड़ी होकर फार्म लेने को विवश हैं। जनता से सीधे जुड़ाव होने से हमेशा विवाद की स्थिति एवं रिश्वतखोरी के मामले में काफी बदनाम होने के कारण पटवारी की नौकरी बेरोजगारों, खासकर अधिक पढ़े-लिखों को आकर्षित नहीं कर पा रही थी, लेकिन बढ़ती हुई बेरोजगारी के दौर में आज स्थिति एकदम बदल गई है। पीएससी सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में असफल हो चुके उम्मीदवार भी इसे छात्रवृत्ति के तौर पर पाना चाहते हैं।

उनकी सोच है कि पटवारी की नौकरी करते हुए अपने अगले लक्ष्य को पाया जा सके। 2003 को आयोजित पीएससी की प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले रमेश जसवाल का कहना है कि पीएससी का विज्ञापन कब जारी होगा पता नहीं, इसके साथ ही इसमें चयन की भी कोई गारंटी नहीं है।

ऐसी स्थिति में वे पटवारी या अन्य किसी छोटी परीक्षा में चयनित होकर अपने आपको सुरक्षित करने की कोशिश कर रहे हैं। यह नौकरी पाने के बाद वे अपने लक्ष्य को पाने का प्रयास करते रहेंगे। इसी तरह दो विषयों में एमए कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे सनत देवांगन ने बताया कि वर्तमान स्थिति में नौकरी मिलना प्रमुख है। पद के हिसाब से नौकरी ढूंढेंगे तो हो सकता है कि कुछ भी ना मिले। उन्होंने शिक्षाकर्मी की परीक्षा भी दी थी, लेकिन असफल रहे।

दिन भर में बिक गए 28 सौ फार्म: मुख्य डाकघर एवं एसबीआर जरहाभाठा कालेज को मिलाकर मंगलवार को एक ही दिन में 28 सौ आवेदन फामोर्ं की बिक्री हो गई। इस दौरान डाकघर में शाम तक 15 सौ फार्म हाथों-हाथ बिक गए, वहीं जरहाभाठा कालेज में 1326 फार्मो की बिक्री की गई।

एक फार्म बेचने में 8 मिनट का समय
आवेदकों को दो वर्गो में रखा गया है। इनमें सामान्य व ओबीसी वर्ग को 4 सौ रुपए में फार्म उपलब्ध किया जा रहा है। इस वर्ग के आवेदकों को फार्म देते समय नाम व आवेदन क्रमांक नोट करने के साथ ही पैसे के लेनदेन को मिलाकर 5 मिनट का समय लग रहा है। इसी तरह एसटीएससी वर्ग के आवेदकों को फार्म नि:शुल्क देने से पहले उनके निवास एवं जाति प्रमाणपत्रों की पूरी जांच की जा रही है। इसके अलावा इनके नाम व आवेदन क्रमांक लिखने व पैसे के लेनदेन के चलते प्रत्येक आवेदन पर 8 से 10 मिनट खर्च हो रहा है।

सुबह 6 बजे से लगती है लाइन
पटवारी परीक्षा के फार्म लेने के लिए डाकघर में सुबह छह बजे से आवेदकों की लाइन लग रही है। आवेदकों को इस बात की जानकारी हो चुकी है कि फार्म की सीमित उपलब्धता के मुकाबले आवेदकों की संख्या दस गुना अधिक है। ऐसी स्थिति में वे कोई रिस्क लेना नहीं चाहते। यही कारण है कि आवेदक सुबह छह बजे से ही विक्रय केंद्रों में नजर आने लगे हैं।





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