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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior ग्वालियर.
जिस पिता के कंधे पर खेलकर वह बड़ी हुई, उसकी अर्थी को अपना कंधा और चिता को मुखाग्नि देना, बहुत हिम्मत का काम था, लेकिन मन में गहरी संतुष्टि भी थी कि आखिर उसने बेटे का फर्ज निभा दिया।
पिता की अर्थी के साथ बेटी को हांडी लेकर जाते जिसने भी देखा उसकी आंखें नम हुए बिना नहीं रह सकीं। नयाबाजार की गणोश कॉलोनी में रहने वाले 55 वर्षीय हेंमत शर्मा को बेटे न पैदा होने की कमी आज उनकी बेटी ने दूर कर दी।
वे पिछले आठ साल से बीमार थे, बीती रात करीब नौ बजे हेंमत ने आखिरी सांस ली। रिश्तेदार बताते हैं कि परिवार में हेंमत की बेटी लवली के अलावा कोई नहीं है। उनकी के जाने के बाद पहला सवाल यही था चिता को मुखाग्नि कौन देगा?
हेंमत की मौत की खबर इंदौर में उनके ताऊ को भी दी गई, लेकिन कुछ कारणों के चलते उन्होंने आने में असमर्थता जता दी तो लवली ने तय किया कि पिता की चिता को वह मुखाग्नि देगी।
आठ साल से बीमार पिता की हर पल सेवा कर रही लवली ने ताउम्र बेटे का फर्ज निभाया। हेमंत की अर्थी जब घर से मुक्तिधाम के लिए निकली तो लवली ने कंधा देने के साथ हांडी लेकर अर्थी को मुक्तिधाम तक पहुंचाया और यहां भी पूरे रीति रिवाज से उनकी चिता को मुखाग्नि देकर बेटे का फर्ज पूरा किया।