bhaskar Web English
HomeNewsRajasthanAjmer Ajmer

सरकारी रवैये से उच्च शिक्षा गर्त में

अजमेर. kundu ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना के तहत मदस विवि को दिए जाने वाले अनुदान की जरूरतों और संभावनाओं को टटोलने आई यूजीसी टीम के मुखिया अमिताभ कुंडू ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लचर बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार का रवैया सहयोगकात्मक नहीं है।

इस कारण यहां उच्च शिक्षा लगातार गहरे गर्त में जा रही है। जेएनयू दिल्ली से सेवानिवृत्त अर्थशास्त्र के प्रोफेसर अमिताभ कुंडू ने कहा कि यहां की सरकार ने उच्च शिक्षा को सपोर्ट नहीं किया। यूजीसी ने अपनी दसवीं योजना के अंतर्गत एमडीएस विवि को कुछ पद दिए थे लेकिन सरकार ने पांच साल में इनको नहीं भरा। यही रवैया उच्च शिक्षा के लिए घातक साबित हो रहा है। नतीजतन एमडीएस जैसा विवि शिक्षकों की कमी झेल रहा है जिसे अध्यापकों की सख्त जरूरत है।

उच्च शिक्षा पर चिंतन ही नहीं : कुंडू ने दो टूक कहा कि एमडीएस में शिक्षकों की कमी के बावजूद यहां के स्टाफ में उत्साह की कमी नहीं है। केंद्र और राज्य सरकारों को यह देखना चाहिए कि कम संसाधनों के बाद भी इस विश्वविद्यालय ने एक मुकाम बनाया है।

जो योजनाएं केवल मुट्ठी भर शिक्षकों के दम पर संचालित की जा रही हैं, उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए। दुर्भाग्य है कि ऐसा हो नहीं रहा है। राज्य सरकार में उच्च शिक्षा पर चिंतन करने वाला कोई नहीं है। इसी रवैये को देखते हुए हमने यूजीसी से कह दिया है कि पैसा तब तक न दिया जाए, जब तक राज्य सरकार पूरे सहयोग का वादा न करे।

विवि को मिलना चाहिए पर्याप्त धन
यदि राज्य सरकार सहयोग न करे तो विवि खुद अपने आर्थिक स्रोत ढूंढे। ऐसी स्थिति में भी विवि अपने दम पर ज्यादा से ज्यादा चार या पांच कोर्स ही चला सकता है। यूजीसी को पैसा देने में कोई कंजूसी नहीं करनी चाहिए और विवि को पर्याप्त धन मिलना चाहिए। साथ ही राज्य सरकार को भी पूरा सहयोग करने के लिए वह एक पत्र भेजे ताकि उच्च शिक्षा में राजस्थान को आगे लाया जा सके। वर्तमान में राजस्थान में उच्च शिक्षा का स्तर बहुत दयनीय है। सिर्फ कंप्यूटर और मैनेजमेंट के कोर्स से ही उच्च शिक्षा आगे नहीं बढ़ेेगी। सामाजिक विषयों पर भी विस्तृत ज्ञान आवश्यक है।

करनी होगी ज्यादा कोशिश
एमडीएस विवि को संसाधनों से पूर्ण करने के लिए हमें सीमाओं से बाहर जाना होगा। कुंडू ने कहा कि हमारा प्रयास ज्यादा से ज्यादा अनुदान देने का है। शिक्षकों की कमी को हमने गंभीरता से लिया है। इसके लिए एमडीएस को भी अपनी सीमाएं लांघनी होगी और अपने से संबद्ध कॉलेजों की पूरी मदद करनी होगी। केंद्रीय विवि का दर्जा हासिल करने के लिए एमडीएस को ज्यादा प्रयास करने होंगे। हमारी तो यही राय है कि इसे ही केंद्रीय विवि बना दिया जाए ताकि सरकार की मंशा भी पूरी हो जाए और एमडीएस को भी पूरे संसाधन मिल जाएं।

वैश्विक सोच मौजूद है यहां
केवल 29 की फैकल्टी होने के बाद भी यहां के प्रोफेसर पूरी लगन और समर्पण से काम करते हैं। एमडीएस का हर प्रोफेसर अपनी इमेज के लिए काम करता है। दूसरे विवि में फैकल्टी का ध्यान केवल अपने छात्रों ओैर क्लास रूम तक ही रहता है। उनकी सोच अपने विभाग से बाहर नहीं निकली है। इंटरनेशनल लेवल का कमिटमेंट केवल एमडीएस में ही देखने को मिला। यहां हर प्रोफेसर की थिंकिंग ग्लोबल है।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: