कोलकाता.
टाटा मोटर्स ने सिंगुर में नैनो के प्लांट पर काम पूरी तरह बंद करते हुए उसका निर्माण दूसरी जगह करने की औपचारिक घोषणा कर दी है। । सूत्रों के अनुसार कंपनी परियोजना उत्तराखंड के पंतनगर जिले में लगा सकती है।
उधर आज सिंगूर में ममजा बनर्जी के धरने को लेकर किसानों का एक और गुट सामने आ गया है जो ममता का विरोध कर रहा है । इनका कहना है कि अगर ममता ने धरनो बंद नहीं किया तो उसके खिलाफ आंदोलन चलाया जाएगा।
उत्तराखंड का पंतनगर क्यों
>> टाटा पश्चिम बंगाल छोड़ते हैं तो नैनो बनाने के लिए उत्तराखंड का पंतनगर उनका अगला ठिकाना हो सकता है। कहा जाता है कि उन्होंने उत्तराखंड में दूसरी असेंबली लाइन तैयार रखी है। यहां टाटा 407 का भी एक प्लांट है।
>> उत्तराखंड में 4-6 सैटेलाइट संयंत्र लगाने की बात हुई थी जहां कम्पलीटली नॉक्ड डाउन यूनिट्स की एसेंब्लिंग की जानी थी।
>> टीवी चैनल्स के अनुसार उत्तराखंड सरकार ने टाटा मोटर्स के सामने नैनो निर्माण के लिए अतिरिक्त बिजली मुहैया कराने का प्रस्ताव रखा है। सरकार लीज रेंट में सुविधा देने को भी तैयार है।
..तो 10 फीसदी मंहगी हो सकती है नैनो
उत्तराखंड को मदर प्लांट बनाने में छह माह का समय लग सकता है। इसमें 100-200 करोड़ खर्च आ सकता है। इससे नैनो 10 फीसदी तक महंगी हो सकती है
क्यों चुना था सिंगुर
>> हलदिया बंदरगाह का नजदीक होना भी इसका एक कारण था। टाटा अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया के विकासशील देशों में नैनो को एक्सपोर्ट करते क्योंकि सस्ती होने के कारण वहां इसकी जरूर मांग होती। इसके लिए यह बंदरगाह मुफीद थी।
>> यह जमशेदपुर स्थित टाटा स्टील प्लांट के नजदीक था। हालांकि यह स्टील प्लांट प्रति वर्ष 2.5 लाख नैनो बनाने की क्षमता वाले सिंगुर प्लांट की जरूरत को पूरी नहीं कर पाता परंतु फिर भी प्रमुख स्टील सप्लायर होता।
>> टाटा मोटर्स कोलकाता के नजदीक प्लांट लगाना चाहता था और इसके अलावा सिंगुर में जमीन बेहद सस्ती मिली।
>> माना जा रहा है कि पश्चिम बंगाल सरकार ने टाटा को कई तरह की छूट दी थी, हालांकि इनका खुलासा नहीं हुआ है।