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सिद्धि विनायक का ‘असली मालिक’ झोपड़पट्टी में

मुंबई.siddhivinayak आप शायद यह जानकर चौंक जाएं कि महानगर के जिस सिद्धि विनायक मंदिर में मशहूर हस्तियों समेत लाखों लोग दर्शन करने आते हैं और साल में करोड़ों रुपए का दान इकट्ठा होता है, उसका ‘असली मालिक’ पास की कच्ची बस्ती में एक झोपड़पट्टी में रहता है।

जां हां। बुधवार से शुरू हुए दस दिवसीय गणेशोत्सव के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहेगा, लाखों करोड़ों रुपए का चढ़ावा चढ़ेगा, लेकिन शायद कुछ ही लोग जानते होंगे कि भगवान गणेश की प्रतिमा के नजदीक खड़ा गरीब व्यक्ति इस मंदिर का ‘असली मालिक’ कृष्णकुमार पाटील है। उसे मंदिर के लोग ‘मालक’ के नाम से जानते हैं।

सौ साल की आस्था : पाटील के परिवार ने 100 से अधिक सालों तक मंदिर की देखभाल की है। आज वह कच्ची बस्ती के छोटे से घर में रहने को मजबूर है क्योंकि क्योंकि मंदिर प्रशासन ने मंदिर की आय में से उसे हिस्सा देने से इनकार कर दिया गया है।

कड़वा अनुभव पूरा परिवार : पाटील (60) अपनी बहन और बीमार मां के साथ एक छोटे से मकान में रहते हैं। मंदिर प्रबंधन के साथ कड़वे अनुभव के बावजूद वे और उनकी मां रोजाना दो बार मंदिर में पूजा के समय उपस्थित रहते हैं।

एक सुविधा : उन्हें केवल एक सुविधा प्राप्त है कि वे आरती में शामिल होने के लिए बिना किसी रोक-टोक के मंदिर के गर्भगृह तक पहुंच सकते हैं।

कोर्ट में लड़ाई : पाटील ने मंदिर का मालिकाना हक वापस पाने के लिए ट्रस्ट को बांबे हाईकोर्ट में चुनौती दी है। कोर्ट ने पाटील को एक ट्रस्टी बनाने का ट्रस्ट को आदेश भी दिया, लेकिन वह इससे संतुष्ट नहीं है। पाटील को मंदिर की आय में से 25 प्रतिशत हिस्सा चाहिए। मामला फिलहाल कोर्ट में लंबित है।

कैसे हैं असली मालिक :
* सिद्धि विनायक मंदिर 1801 में बना था। उसी साल नवंबर में मुंबई निवासी लक्ष्मण वेदू पाटील ने मंदिर का रंगरोगन कराया।
* उसके बाद उनके बेटे सुंदर ने मंदिर की देखभाल की।
* सुंदर की मौत के बाद उसके भाइयों तुकाराम, माणिक और जानू ने मंदिर का प्रबंधन अपने हाथ में ले लिया। कृष्णकुमार पाटील माणिक के बेटे हैं।
* परिवार में विवाद के चलते पाटील परिवार ने 1936 में मंदिर का प्रबंधन गोविंदराव फाटक को सौंप दिया, जिन्होंने 1973 तक मंदिर का प्रबंधन देखा।
* 31 दिसंबर 1973 को महाराष्ट्र सरकार ने मंदिर की देखरेख के लिए ट्रस्ट का गठन किया।

‘मेरे पास मेरी मां के इलाज के लिए भी पैसे नहीं हैं। हमारा मकान टूट-फूट रहा है और उसमें एक पंखा तक नहीं है। मगर ट्रस्ट का रवैया उपेक्षापूर्ण है।’
- कृष्णकुमार पाटील

‘पाटील को कुछ नहीं मिलेगा, क्योंकि उसने ट्रस्टियों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। उसने कोर्ट में अपील की है, यह उसका अधिकार है।’
- सुभाष मायेकर, ह्यट्रस्ट चेयरमैन





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