नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने उड़ीसा के हिंसाग्रस्त कंधमाल जिले में ईसाई समुदाय के लोगों के जान-माल की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों के बारे में राज्य सरकार से गुरुवार तक रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
शीर्ष कोर्ट ने राज्य सरकार को एक हलफनामा दायर कर यह स्पष्ट करने को कहा है कि दिवंगत स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के अस्थिकलश के साथ विहिप नेता प्रवीण तोगड़िया की प्रस्तावित यात्रा की अनुमति दी गई है या नहीं। मामले की सुनवाई गुरुवार को होगी। याचिकाकर्ता कटक के आर्कबिशप राफेल चीनाथ ने आरोप लगाया कि इस मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाए जाने के बाद से उड़ीसा में हिंसा की और घटनाएं हुई हैं। हिंसाग्रस्त गांवों में से एक में चर्च को क्षतिग्रस्त करने के अलावा लगभग 100 ईसाई परिवारों को बेघर कर दिया गया है।
याचिकाकर्ता के वकील कोलिन गोंजाल्वेस ने तोगड़िया की प्रस्तावित यात्रा पर रोक लगाए जाने की मांग करते हुए कहा कि यात्रा के कारण पहले से ही तनावग्रस्त चल रहे इलाके में हालात और बिगड़ सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थिति को संभालने में अर्धसैनिक बलों को सरकार और पुलिस का सहयोग नहीं मिल रहा है।
सुनवाई के दौरान एडीशनल सॉलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम ने कहा कि केंद्र सरकार उड़ीसा की स्थिति पर नजर रखे हुए है। उन्होंने कहा कि राज्य के किसी वरिष्ठ सरकारी अधिकारी को कोर्ट को आश्वासन देना चाहिए कि हिंसाग्रस्त इलाकों में लोगों की जान-माल की सुरक्षा के लिए अर्धसैनिक बलों को पूरा सहयोग प्रदान किया जाएगा।