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भूल से हुआ शहर का भला

भोपाल. तेरह साल पहले हुई आकलन की गलती की पोल इस बार के मास्टर प्लान की तैयारी के दौरान खुल गई। पिछले मास्टर प्लान में जिस उपयोग के लिए जितनी भूमि तय की गई थी वास्तव में वह उससे काफी ज्यादा निकली है।

गत मास्टर प्लान का आकलन इस कदर असफल हुआ है कि यदि भूल से आवासीय उपयोग के लिए अधिक भूमि नहीं मिली होती, तो शहर का विकास काफी पहले रुक जाता और लोगों को मकान बनाने जगह नहीं मिल पाती।

1995 में बनाए गए मास्टर प्लान में हुई भूल से भोपाल के विकास के लिए 6 हजार 540 हेक्टेयर भूमि अधिक मिल गई। तत्कालीन मास्टर प्लान में आवासीय, वाणिज्यिक एवं अन्य गतिविधियों के उपयोग के लिए 17 हजार 560 हेक्टेयर भूमि कागजों में निर्धारित की गई थी, पर हकीकत में जब उक्त जमीन को नापा गया तो वह 24 हजार 100 हेक्टेयर निकली। इतनी अधिक भूमि मिल जाने से शहर में अब भी विकास के सभी प्रयोजनों के लिए काफी भूमि शेष है।

गत मास्टर प्लान का एक भयावह पहलू यह भी है कि उस समय के आकलनकर्ताओं ने 2005 तक शहर की आबादी लगभग 25 लाख मानी थी और उसी के अनुसार मास्टर प्लान में आवासीय उपयोग के लिए 8190 हेक्टेयर भूमि निर्धारित की थी, लेकिन 2008 तक भोपाल की आबादी मात्र 18 लाख 37 हजार तक ही पहुंच सकी फिर भी यहां 9335.17 हेक्टेयर भूमि का आवासीय उपयोग किया जा चुका है, जो निर्धारित से 1145.17 हेक्टेयर अधिक है। यदि गणना की गलती की वजह से अधिक भूमि नहीं मिली होती तो लोगों को मकान बनाने जमीन ही शेष नहीं रहती।

जीआईएस सिस्टम से भूमि को नापा तो पता चला
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने जब नया मास्टर प्लान तैयार करने गणना शुरू की और जीआईएस सिस्टम के जरिए भूमि को मापा गया तो पता चला कि नक्शे में मौजूद जमीन ज्यादा है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले नक्शे मैनुअली बनाए जाते थे जिसमें गलती की संभावना रहती थी। इस बार ग्लोबल इंडीकेटिंग सिस्टम (जीआईएस) की मदद ली गई है और सभी गणनाएं कंप्यूटर के द्वारा की गई हैं।

धीमी गति के कारण चुनाव के बाद ही आएगा मास्टर प्लान
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के उच्चधिकारियों के अनुसार जिस धीमी गति से मास्टर प्लान को लेकर शासन स्तर पर गतिविधियां संचालित हो रही हैं उसके अनुसार मास्टर प्लान अब चुनाव के बाद ही आ सकेगा।

इस बार नहीं होगी गलती
पिछले मास्टर प्लान में मिली ज्यादा जमीन को नए मास्टर प्लान में समायोजित किया गया है। पहले मैनुअली काम होता था इसलिए यह भूल हुई है, इस बार किसी भी तरह की तकनीकी गड़बड़ी नहीं होगी।
-पीडी साहू, संयुक्त संचालक, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग





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