भोपाल.
दस दिवसीय गणोशोत्सव का शुभारंभ बुधवार को श्रद्धा भक्ति भरे वातावरण में हुआ। राजधानी में सात सौ से अधिक स्थानों पर छोटी-बड़ी गणोश प्रतिमाओं की स्थापना की गई है। अनेक स्थानों पर पंडालों में भगवान गणोश की स्थापित भव्य और मनमोहक प्रतिमाएं लोगों के आकर्षण का केंद्र रहीं।
झांकियां और घरों में प्रतिमाओं की स्थापना का सिलसिला दोपहर बारह बजे से शुरू हो गया था। श्रद्धालुओं ने वेद मंत्रों व स्वस्ति वाचन कर गिरजानंदन की प्रतिमाओं की स्थापना की। मोदक, बूंदी व मगज के लड्डु व फलों का भोग लगाकर बांटा गया।
पीपल चौक में भोपाल के राजा गणोश: पीपल चौक की झांकी शहर की प्रथम झांकी के नाम से जानी जाती है। यहां ऋद्धि-सिद्धि समेत भगवान गणोश को 21 किलो वजनी चांदी के सिंहासन पर विराजमान किया गया है। ऋद्धि-सिद्धि संग बिराजे गणोश को समिति ने भोपाल के राजा नाम दिया है।
भक्ति के संग उत्सव के रंग: बच्चे सुबह से ही मोहल्लों में गणपति बप्पा के जयकारे लगाने लगे थे।कुछ स्थानों पर गणोशजी की दस से बारह फीट ऊंची प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। बारिश से बचाने के लिए झांकियों पर पहले दिन से ही तिरपाल व पन्नियां चढ़ी दिखाई दी।महाराष्ट्रीयन समाज द्वारा अनेक स्थानों पर उत्सव भव्य रूप से मनाने की तैयारियां की गई हैं।
बाजे-गाजे संग ले जाई गईं प्रतिमाएं: शहर में हर तरफ गणपति के जयकारे गूंज रहे थे। बाजारों और मूर्तिकारों के यहां भारी भीड़ थी। दिन भर प्रतिमाओं को ढोल-बाजों के साथ पंडालों में ले जाया जाता रहा। मोहल्लों में उत्सवी माहौल था।
रात आठ बजे से गणोश मंदिरों व झांकी स्थलों पर पूजा-आरती के लिए श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। यहां विधि-विधान से विघ्न विनाशक की प्रतिमाओं की स्थापना की गई। पीपल चौक, सुभाष चौक, चौकी चौक, जनकपुरी, हनुमानगंज, इतवारा, मंगलवारा बस स्टैंड, जीपीओ, चांदबड़ कपड़ा मिल, जहांगीराबाद, बरखेड़ी, जिंसी, तलैया, चौबदारपुरा, में एक से बढ़ कर एक प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। इसी तरह कमला पार्क, कोहेफिजा, रोशनपुरा, न्यू मार्केट, दस नंबर, शाहपुरा, तुलसी नगर, शिवाजी नगर, कोलार रोड़ बैरागढ़ व भेल के कई क्षेत्रों में आकर्षक झांकियां सजाई र्गई हैं। न्यू मार्केट में अमरनाथ और पाताललोक की झांकियां आकर्षण का केंद्र हैं।
सौ क्विंटल से अधिक लड्डू चढ़े
भगवान गणोश को लड्डू बहुत पसंद हैं। इनमें भी उन्हें मोदक के लड्डू अधिक भाते हैं। गणोश की पूजा हो और उसमें लड्डुओं का भोग न लगे ऐसा हो ही नहीं सकता। हलवाइयों की मानें तो चतुर्थी पर गणपति को प्रसन्न करने भोग के लिए भक्तों ने जमकर लड्डुओं की खरीदी की।
तकरीबन सौ क्विंटल से अधिक लड्डुओं की बिक्री हुई। किसी ने गणोश को मोदक, मगज और बूंदी के तो किसी ने ड्राई फूड वाले लड्डू चढ़ाए। पीपल चौक के गणोशजी को डोल ग्यारस पर तीन क्विंटल लड्डुओं का भोग लगेगा।