भोपाल. राज्य सरकार अपने कर्मचारियों को छठवां वेतनमान देने के लिए पांच विकल्पों पर विचार कर रही है। इसके पहले उसे यह तय करना है कि केंद्र के समान नए पे-बेंड तथा ग्रेड-पे व्यवस्था का लाभ जस का तस दिया जाए। अगर ऐसा करना मुमकिन न हो तो संभावित वेतन या पेंशन विसंगति को ध्यान में रखते हुए इसमें मामूली परिवर्तन किया जाए।
सूत्रों के मुताबिक सचिव वित्त एपी श्रीवास्वत ने जो विकल्प सुझाए थे, उन्हें प्रमुख सचिव वित्त से लेकर वित्त मंत्री और मुख्य सचिव ने आगे बढ़ाते हुए प्रस्ताव मुख्यमंत्री तक पहुंचा दिया है। इनमें से बेहतर विकल्प चुनकर उस पर अमल करने के बारे में उच्च स्तर पर विचार-विमर्श जारी है।
क्या है वेतन बेंड तथा ग्रेड पे व्यवस्था
छठवे केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों की मुख्य विशेषता एक से अधिक वेतनमानों के स्थान पर वेतन बेंड तथा ग्रेड पे की व्यवस्था की गई है। इस तरह केंद्र सरकार में प्रचलित 31 वेतनमानों के स्थान पर मात्र पांच पे बेंड की अनुशंसा की गई है।
एक से अधिक वेतनमानों को मिलाकर एक पे बेंड प्रस्तावित है। वर्तमान में मंजूर वेतनमान के तहत देय अधिकतम वेतन की चालीस फीसदी राशि के बराबर ग्रेड पे दी जानी है। एक जनवरी 2006 की स्थिति में केंद्रीय कर्मचारियों को नए वेतनमान से औसतन 25 फीसदी वेतनवृद्धि का लाभ मिलने का अनुमान है।
कितना वित्तीय भार आएगा
केंद्र के समान वेतन और पेंशन पुनरीक्षण करने पर राज्य को बकाया चुकाने पर लगभग 7500 करोड़ रुपए का वित्तीय भार आएगा। साथ ही 1 सितंबर से नगद भुगतान करने पर 31 मार्च 2009 तक लगभग 1150 करोड़ रुपए का व्यय भार आने का अनुमान है।
इनमें से चुना जाएगा बेहतर विकल्प..
1 सितंबर 2008 से कर्मचारियों को 15 फीसदी अंतरिम राहत तथा पेंशनरों को 10 प्रतिशत अंतरिम राहत का लाभ नगद दे दिया जाए। राज्य वेतन आयोग की सिफारिश प्राप्त होने पर केंद्रीय वेतन ढांचे के अनुरूप राज्य में वेतन ढांचा लागू किया जाए।
1 सितंबर 08 से नगद लाभ दे दिया जाए। साथ ही 1 जनवरी 2006 से अगस्त 2008 की अवधि के लगभग 7500 करोड़ रुपए बकाए का भुगतान आगामी तीन वषों में किया जाए। बकाया का भुगतान पहले दो साल तक तो तीस-तीस फीसदी किया जाए। तीसरे वर्ष यानि वर्ष 2011 में चालीस प्रतिशत राशि का भुगतान कर दिया जाए।
प्रदेश के कर्मचारियों को केंद्र के समान नये पे-बेंड तथा ग्रेड-पे व्यवस्था का लाभ 1 अप्रैल 2007 से दिया जाए। इसके पीछे तर्क यह है कि राज्य सरकार ने महंगाई वेतन की व्यवस्था प्रदेश में इसी तारीख से लागू की है। नए वेतन का नगद लाभ 1 सितंबर 2008 से दिया जाए। इसके पहले की अवधि के लिए लगभग 4000 करोड़ रुपए बकाए का भुगतान आगामी दो वित्तीय वर्र्षो में किया जाए। वर्ष 2009 में 40 फीसदी और वर्ष 2010 में 60 प्रतिशत राशि दे दी जाए।
प्रदेश के कर्मचारियों को केंद्र के समान नए पे-बेंड तथा ग्रेड-पे व्यवस्था का लाभ 1 अप्रैल 2008 से दिया जाए। इसके पीछे सरकार की मंशा यह है कि राज्य सरकार ने केंद्र के समान महंगाई भत्ते की घोषणा फरवरी 2008 में की है। साथ ही नए वेतन का नगद लाभ 1 सितंबर 2008 से दिया जाए। फरवरी 2008 से अगस्त 2008 के बीच की अवधि के बकाए के भुगतान के लिए 1500 करोड़ रुपए का प्रावधान अगले वित्त वर्ष के बजट में कर दिया जाए।
प्रदेश के कर्मचारियों को केंद्र के समान नये पे-बेंड तथा ग्रेड-पे व्यवस्था का काल्पनिक लाभ 1 जनवरी 2006 से दिया जाए। साथ ही नए वेतन का नगद वास्तविक लाभ 1 सितंबर 2008 से दिया जाए।