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सूखे से निपटने के लिए कमर कसी

इंदौर. मानसून की विदाई का समय करीब आ गया है। इंदौर जिले में सूखा पड़ना लगभग तय हो गया है। शासन ने भले ही घोषणा न की हो लेकिन प्रशासन ने सूखे से निपटने के लिए तैयारी शुरू कर दी है। सबसे गंभीर स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों में पीने के पानी की है।

प्रशासन ने जलसंकट से निपटने के लिए 765 लाख रुपए का पैकेज बनाया है। ग्रामीणों का पलायन, पशुओं का चारा, बीमारी, रोजगार, रबी फसलों का अनुमान लगाकर भी पैकेज तैयार किए जा रहे हैं। तकरीबन दो हजार करोड़ रुपए का पैकेज बनाकर शासन को भेजने की तैयारी कर ली है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी महेशचंद्र चौधरी ने बताया पीएचई, कृषि, स्वास्थ्य और पशुपालन विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर ग्रामीण क्षेत्रों से लगातार जानकारी जुटाई जा रही है।

ढाई लाख हेक्टेयर में होती है रबी
खरीफ फसलों के दौरान पानी अच्छा गिरता है तो रबी की भरपूर पैदावार होने की संभावना है। करीब ढाई लाख हेक्टेयर में रबी की बोवनी होती है। अवर्षा की स्थिति में इस बार गेहूं, चने की बोवनी पर भी संकट मंडरा सकता है। अलबत्ता सोयाबीन की सिंचाई भी मुश्किल होती जा रही है।

छह पैकेज बनेंगे
अवर्षा से निपटने के लिए प्रशासन छह पैकेज तैयार कर रहा है। दिसंबर से ही इन्हें अमल में लाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। पानी, बीमारी, रोजगार, पलायन, रबी फसल, पशुओं को पर्याप्त चारा मुहैया कराने के लिए शासन से मांग की जाएगी।

ये है ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति
इंदौर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 8500 हैंडपंप हैं। नल-जल योजना के तहत 200 से ज्यादा कनेक्शन हैं। इस बारिश में यह ठीक से रिचार्ज नहीं हो पाए हैं। वर्तमान में ही दो हजार से ज्यादा हैंडपंप बंद पड़े हैं। अगर और पानी नहीं गिरा तो पीने के पानी का संकट नवंबर-दिसंबर में ही हो जाएगा। जिले में 1 लाख 72 हजार ग्रामीण परिवार हैं। ग्रामीण क्षेत्र के सभी तालाब सूखे पड़े हैं।

10 साल में सबसे गंभीर स्थिति
आंकड़े बताते हैं इस बार 10 वर्षो में सबसे गंभीर स्थिति निर्मित हुई है। 2000 में कुल 568 मिमी पानी गिरा था। इसके बाद वर्ष 2001-02 में क्रमश: 561 और 561.5 मिमी बारिश रिकार्ड की गई थी। इस बार अभी तक केवल 426.6 मिमी (17 इंच) ही पानी गिरा है जबकि पिछले वर्ष इस समय तक आठ सौ मिमी (करीब 30 इंच) बारिश हुई थी। बुधवार को दिनभर में केवल 9.2 मिमी ही पानी गिरा।





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