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फीस की ‘इंजीनियरिंग’ में दबे छात्र

इंदौर. फीस निर्धारण कमेटी के नियमों की आड़ में इंजीनियरिंग कॉलेज प्रबंधन मनमानी वसूली कर रहे हैं। हर कॉलेज की न्यूनतम फीस और अतिरिक्त वसूली के मद तय हैं जिनका बेजा फायदा उठाया जा रहा है।

कई जगह तो फीस से दोगुना तक वसूली हो रही है। इंजीनियरिंग की डिग्री लेने के लिए कोई छात्र कर्ज लेकर तो कोई जमीन बेचकर आया है। कॉलेजों की भारी-भरकम डिमांड पूरी करने के बाद भी सुविधाएं गौण हैं। कहीं सालभर से फैकल्टी नहीं, तो कोई परीक्षा ही नहीं ले पाया। छात्र भी पढ़ने के बजाय विरोध के लिए सड़क पर उतरने को मजबूर हैं।

15 सितंबर तक मांगी रिपोर्ट
फीस निर्धारण कमेटी के अध्यक्ष पीएल चतुर्वेदी ने बताया सभी कॉलेजों से वसूली गई फीस की जानकारी 15 सितंबर तक मांगी है। किसी ने ज्यादा पैसा लिया है तो कारण पूछेंगे। वजह स्पष्ट नहीं हुई तो गाज भी गिर सकती है।

इतनी वसूली क्यों?
कॉलेज की अन्य सुविधाओं का इस्तेमाल करने वाले छात्रों से होस्टल, मैस, ट्रांसपोर्टेशन फीस ली जा रही है। द्वितीय व तृतीय वर्ष के बाद ट्रेनिंग व प्लेसमेंट फीस ली जाती है इसलिए फीस एक लाख रुपए तक पहुंच जाती है।

यहां करते हैं गड़बड़
कमेटी की अनुशंसा के बाद कॉलेज एजुकेशनल टूर, इंडस्ट्री विजिट, प्रोजेक्ट, डेवलपमेंट चार्ज, गेस्ट लेक्चर, इंटरनेट चार्ज पर्सनालिटी डेवलपमेंट और वार्षिक पत्रिका के नाम पर २क्-२५ हजार रुपए प्रत्येक छात्र ऐंठ लेते हैं।

शिकायत करें परिजन
फीस निर्धारण कमेटी द्वारा तय फीस से ज्यादा वसूली की विस्तृत जानकारी लेकर पालक कमेटी के भोपाल कार्यालय में शिकायत कर सकते हैं।

बस फीस जरूरी नहीं
कमेटी ने स्पष्ट किया है बस फीस भी तभी लें जब छात्र उपयोग करे। मैस में भोजन करना ऐच्छिक है लेकिन कॉलेज ऐसा नहीं मानते।

शासन का आदेश
प्रदेश शासन का आदेश है कोई भी तकनीकी शिक्षण संस्थान निर्धारित फीस से ज्यादा नहीं ले सकता है। जस्टिस गुलाब गुप्ता द्वारा २४ जनवरी २क्क्७ को पारित आदेश में कॉलेजों के नाम के साथ फीस निर्धारित की गई। जिनके नाम नहीं हैं वे ट्यूशन फीस और विकासात्मक शुल्क ले सकते हैं। इसके अतिरिक्त लगने वाले सात अलग-अलग शुल्क भी ३क् अप्रैल २क्क्५ को पारित आदेशानुसार लिए जा सकते हैं। उसमें भी होस्टल का किराया, मैस चार्जेस व होस्टल की कॉशन मनी शामिल नहीं है।

डर पांच सौ नंबर कटने का
छात्र कहते हैं कॉलेजों द्वारा की जा रही मनमानी वसूली का विरोध करने पर हमें नुकसान हो सकता है। चार साल की पढ़ाई के दौरान पांच सौ नंबर कॉलेज प्रबंधन के हाथ में होते हैं। विरोध करने पर फीस घटे न घटे, नंबर तो कट ही सकते हैं। ऐसा होने पर डिग्री का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।





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