देवास. एक ने कहा और चल दिया मददगारों का कारवां। 25 किमी के फासले में जो भी व्यक्ति दुर्घटना का शिकार हुआ कभी 5 मिनट से ज्यादा सड़क पर इंतजार नहीं करना पड़ा। पुलिस की राह देखने की बजाय घायल की जान बचाना छह गांवों के लोगों की आदत में शुमार है। सहयोग की इस जनभागीदारी में सैकड़ों मददगार हाथ शामिल हैं।
जिला मुख्यालय से 10 से 30 किमी की दूरी पर एबी रोड किनारे स्थित चिड़ावद, कलमा, टोंककला, भैरवाखेड़ी, पिपल्यासड़क व आलरी गांव के लोग मानव सेवा में जुटे हैं। चाहे छोटी हो या बड़ी दुर्घटना, सूचना मिलते ही वे सब काम छोड़कर घायलों की जान बचाने के लिए दौड़ पड़ते हैं। उपलब्ध वाहन से तत्काल नजदीक के अस्पताल पहुंचाते हैं।
यह सिलसिला 10 साल से चल रहा है। चिड़ावद के पूर्व सरपंच रुस्तमसिंह पटेल ने कहा रोजाना एबी रोड पर एक-दो एक्सीडेंट होते हैं। सोहनलाल चौधरी पिपलिया सड़क, विक्रम पटेल व रघुनंदन जलोदिया चिड़ावद ने बताया एक्सीडेंट के बाद पुलिस के आने का इंतजार नहीं करते, हमारा पहला उद्देश्य घायल का तत्काल उपचार कराना है, इसके बाद बकायदा पुलिस को सूचना दी जाती है। एसपी डॉ. मयंक जैन ने बताया लोगों का यह कार्य सराहनीय है, इससे अन्य लोगों को प्रेरणा लेना चाहिए।
..फिर भी उत्साह बरकरार
चिड़ावद के शिवजीराम पटेल, रुस्तमसिंह पटेल जसवंतसिंह राजपूत टोंककला सहित ऐसे करीब 10 व्यक्ति हैं जिनके नाम 20-25 दुर्घटनाओं में गवाह के रूप में दर्ज हैं। कोर्ट पेशी पर जाने व पुलिस थानों के चक्कर लगाने के बाद भी लोगों में सेवा की भावना कम होने की बजाय और बढ़ी है।
लोगों ने ही कर दी थी बस सीधी
सोहनलाल भदेड़िया ने कहा कुछ माह पूर्व चिड़ावद बस स्टैंड के पास इंदौर जा रही एक वीडियो कोच बस पलट गई। बस दरवाजे की साइड से पलटने पर घायलों को निकालने की जगह नहीं बची। लोगों ने सामूहिक प्रयास कर बस उठाकर सीधी कर दी। इससे कई लोगों की जान बच गई।