जयपुर.
पुलिस का लाठीचार्ज मंगलवार देर रात तक नर्सरी टीचर ट्रेनिंग की सौ से ज्यादा छात्राओं के हौसले पस्त नहीं कर पाया।
छात्राओं ने रातभर शिक्षा संकुल के सामने जेएलएन मार्ग को जाम रखा। कुछ छात्राओं ने सड़क पर ही झपकी ली, तो कुछ बारी-बारी से पहरा देती हुई उधर आने वाहनों को रोकती रहीं।
बुधवार सुबह करीब 5:30 बजे पुलिस का भारी जाब्ता मौके पर पहुंचा और छात्राओं को जबरन तीन ट्रकों में बैठाकर जाम खुलवाया। इसी दौरान एक छात्रा बेहोश गई, जिसे एसएमएस अस्पताल ले जाया गया। भास्कर ने रात 10:30 बजे से गुरुवार सुबह छह बजे तक घटनाक्रम पर नजर रखी।
भूखी रहने का संकल्प लिया : रात 11 बजे बजाज नगर व ओटीएस चौराहों पर अवरोधक लगा दिए। शिक्षा संकुल के सामने के मार्ग पर करीब सौ से ज्यादा छात्राएं दिनभर विरोध के बाद सड़क पर ही बैठ गईं। एक छात्रा ने एलान किया कि जब तक मांगें नहीं मानी जाएंगी, नहीं हटेंगे, चाहे जान चली जाए। उसी दौरान एक गाड़ी वहां पहुंची। गाड़ी से एक युवक ने बिस्कुट के पैकेट निकाल कर छात्राओं के सामने रख दिए। उसी समय सभी को संबोधित कर रही छात्रा ने कहा जब तक हमारी मांगें नहीं मानी जाएंगी, तब तक हम भूखी रहेंगीं।
रणनीति बनाई, दी गई जिम्मेदारी
रात 12 बजे छात्राओं ने रणनीति बनाई। निर्णय लिया कि कुछ छात्राओं को छोड़ कर सभी छात्राएं सो जाएं। कुछ छात्राओं ने पीने का पानी लाने की जिम्मेदारी ली, कुछ ने डंडे लेकर अन्य लड़कियों की सुरक्षा तथा गुजरने वाले वाहनों रोकने की जिम्मेदारी ली। इसके बाद करीब 50 से ज्यादा छात्राएं सड़क पर ही सो गईं। पांच छात्राएं बजार नगर चौराहे के पास बने मंदिर व ओटीएस के पास वाले चौराहे पर बने मंदिर से रातभर बोतलों में पानी लाती रहीं।
मोटरसाइकिल सवार की पिटाई : जेएलएन मार्ग पर रात एक मोटसाइकिल सवार ने सड़क पर सो रही दो छात्राओं के बीच में थोड़ी जगह देखकर गाड़ी निकलने की कोशिश की तो छात्राओं ने उसे पकड़ लिया। युवक ने अपशब्द कहे तो छात्राओं ने उस पर डंडे बरसा दिए। आखिर युवक ने माफी मांगते हुए वहां से निकलने में ही भलाई समझी।
मनचले युवकों को खदेड़ा, पुलिस बनी मूकदर्शक : आंदोलनकारी छात्राओं ने रात दो बजे गणोशजी के दर्शन करने पैदल जाने वाले श्रद्धालुओं में से महिलाओं को जाने दिया, जबकि पुरुषों को वे फुटपाथ से होकर जाने की हिदायत दी। इस बीच वहां कई मनचले युवक छेड़छाड़ करने लगे। कुछ लड़कियों ने इसकी पुलिसकर्मियों से शिकायत की, लेकिन पुलिस पर असर नहीं हुआ। इस पर छात्राओं ने खुद ही मनचलों को खदेड़ा।
रात्रि तीन बजे दो छात्राओं को छोड़ा : दिन में पुलिस के लाठीचार्ज के दौरान दो छात्राओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। इस पर छात्राएं बार-बार पुलिस से दोनों छात्राओं को छोड़ने की मांग करती रहीं। रात में एक छात्रा प्रियंका के परिजन वहां पहुंचे और तीन बजे गांधीनगर पुलिस ने दोनों छात्राओं को छोड़ दिया। करीब 3:30 बजे दोनों छात्राएं पहुंचीं तो कुछ छात्राएं उन्हें देखकर रोने लगीं।
पूर्व छात्र नेताओं ने धमकाया तो छात्राओं ने की शिक्षा मंत्री के खिलाफ नारेबाजी : ढाई बजे दो पूर्व छात्र नेता पहुंचे और सड़क पर सो रही छात्राओं को पुलिस जाब्ता आने की बात कह कर डराने लगे। इस बीच कुछ छात्राओं ने शिक्षा मंत्री के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। नारेबाजी को देख दोनों छात्र नेता वहां से चले गए, लेकिन आधे घंटे बाद फिर पहुंचकर छात्राओं को धमकाने लगे।
सहेली की पिटाई देख बेहोश हुई
सुबह 5:30 बजे अचानक चार जिप्सियां, तीन ट्रक व एक बस में भारी पुलिस जाब्ता मौके पर पहुंचा। पुलिस के जवान व अधिकारी छात्राओं को धमकाने लगे। इस दौरान मौके पर छात्राओं और पुलिसकर्मियों में जोर आजमाइश भी हुई।
जाब्ता पहुंचा, नहीं थी महिला कांस्टेबल : जाब्ते में महिला कांस्टेबल नहीं थी, जबकि तीन महिला पुलिस अधिकारी थीं। पुलिस को देख छात्राओं ने एक-दूसरे को कस कर पकड़ लिया। महिला पुलिस अधिकारी ने जब छात्राओं को अलग करने की कोशिश की तो कुछ छात्राएं रोने लगीं।
एक छात्रा को ज्यादा विरोध करते देख महिला पुलिस अधिकारी ने उसकी पिटाई कर दी। छात्रा को पिटते देख एक छात्रा बेहोश हो गई। कुछ छात्राओं ने पानी के छींटे मारे, लेकिन वह होश में नहीं आई। मीडिया के फोटो खींचते देख एक महिला अधिकारी भड़क गई और बोली खड़े-खड़े क्या देख रहे हो, इसे गाड़ी में डालो। इसके बाद बेहोश छात्रा को एसएमएस अस्पताल ले जाया गया।