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सुरक्षित निवेश से संरक्षित भविष्य

ग्वालियर. deposit निवेश के लिए नित नए तरीकों से बाजार भरा हुआ है। साथ ही निवेशक कंपनियां भी ग्राहकों को लुभाने के लिए कई आकर्षक योजनाएं बनाती रहती हैं, लेकिन यह आपको तय करना है कि कहां और कैसे आप अपने पैसे का सही निवेश कर सकते हैं।

अपनी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, आर्थिक स्थिति व एक्सपर्ट की सलाह से आप भी स्वस्थ निवेश कर अपने रुपयों का उचित मूल्य पाएं।

फिक्स्ड डिपॉजिट्स हुए पुराने : पायल ने 20 वर्ष की एफडी जो बनवा रखी थी। चर्चा के दौरान उसने अपनी एक सहेलीको इस बारे में बताया तो उसने उसे सलाह दी कि एफडी अतीत की बात हो चुकी है और अब लोग फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान यानी एफएमपी में बेहतर निवेश कर रहे हैं। कभी फिक्स्ड डिपॉजिट्स यानी एफडी को निवेश का सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता था, जहां बिना किसी रिस्क के एक निश्चित राशि, निश्चित समय के लिए जमा की जाती थी, जिस पर रिटर्न भी निश्चित मिलता था, लेकिन अब वक्त बदल चुका है।

किसमें कितना फायदा : एफडी के कंसेप्ट में कोई खास बदलाव नहीं आया है। यह अभी भी निश्चित रिटर्न देने वाला सबसे सुरक्षित तरीका है। ना ही इन्हें मेंटेन करने का झंझट और न ही आर्थिक तंगी का डर। सुरक्षा, निशिचतता और प्रबंध के संगम के कारण यह सबकी पहुंच में हैं। वहीं कुछ लोगों की अधिक पैसा कमाने व रिस्क लेने की क्षमता ने एफएमपी को भी काफी लोकप्रिय बना दिया है। एफडी से टैक्स में कोई विशेष छूट न मिलने से ही एफएमपी ने बाजी मार ली है।

टैक्स में फायदा : फाइनेंशियल व रिटेल एक्सपर्ट आलोक माथुर के अनुसार एफडी में बैंक में पैसा जमा होता है, वहीं एफएमपी म्यूच्युअल फंड इंडस्ट्री है, जहां निवेश बॉन्ड्स में होता है। इसकी समयावधि भी अलग-अलग होती है, जैसे चार माह, छह माह, एक वर्ष या उससे अधिक। डेप्ट बेस्ट इनवेस्टमेंट होने से इससे टैक्स में राहत मिलती है। इसमें कैपिटल गेन यानी निवेश पर जितना फायदा हुआ है उसके अनुसार टैक्स देना पड़ता है, जो कि वर्तमान में मात्र 10 प्रतिशत है। वहीं एफडी में आय पर लगने वाला टैक्स प्रतिशत ही इस पर लागू होता है। एफडी से सालान पांच हजार तक की आय पर टैक्स लगता है।

अधिक टैक्स या रिस्क : आप अधिक टैक्स चुकाने वालों के वर्ग में आते हैं, तो एफएमपी बेहतर है, क्योंकि इसमें निश्चित प्रतिशत से ही टैक्स भरना होता है। वहीं कम टैक्स चुकाने वालों को एफडी में ही निवेश करना चाहिए। यदि आप अधिक आय के साथ एफडी में निवेश करते हैं तो प्रत्येक वर्ष टैक्स भी आय के अनुसार चुकाना होगा। वहीं एफडी मैच्योर होने के पहले ही व्रिडॉल की सुविधा देता है, एफएमपी नहीं। इन मैच्योरिटी प्लांस को यदि निश्चित समय से पहले वापस लेते हैं तो निवेश में घाटा उठाने के साथ ही आपको उस निवेशक को भी भुगतान करना पड़ सकता है जिसने बाजार में आपका पैसा लगाया है।

न करें जल्दबाजी : यदि निवेश में सावधानी न रखी जाए तो नुकसान हो सकता है। किसी मित्र या संबंधी से सलाह लेने और किसी की देखा-देखी काम करने की बजाय अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार व एक्सपर्ट की सलाह के बाद ही निवेश करें। आपके पास अधिक पैसा और रिस्क उठाने की क्षमता है तो एफएमपी में निवेश करें। अन्यथा सुरक्षित निवेश यानी एफडी ही बेहतर ऑप्शन है।





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