उदयपुर.
गौरीनंदन, प्रथम पूज्य विनायक के मंदिरों पर फहरती ध्वजाएं, जगमग करती लाइटें, कतारबद्ध होकर बारी का इंतजार करते वृद्ध, युवक-युवतियां ही नहीं, माताओं की उंगलियां पकड़ते हुए मासूम भी, हाथ जोड़कर प्रार्थना में ली.. बुधवार को ऐसे ही कुछ नजारें थे शहर के विभिन्न गणेश मंदिरों पर। गणेश चतुर्थी महोत्सव पर मंदिरों, चौक, गली-कूचों में गणपति बप्पा मोरिया निनाद होता रहा।
बोहरा गणेश के मेले में भीड़
सुंदरवास-पहाड़ा के बीच बोहरा गणेशजी मंदिर में मेले में जहां दिन भर मेलार्थियों की रेलमपेल रही वहीं दर्शनार्थियों की कतारें बहुत दूर तक लगीं। तड़के चार बजे से ही महिलाओं और पुरुषों की अलग-अलग कतारें लग र्गई जो रात तक जारी थी।
शाम को हल्की बारिश के बावजूद लोग जमे रहे। रिमझिम के बीच अपना क्रम आते ही भक्तों ने जय गजानंद की, गणेश की जय-जयकार के साथ प्रथम आराध्यदेव के दर्शनों का लाभ लिया। यहां रात को भजनों की धूम मची रही। औरतें और युवा रात को गणोश के लीला-पदों पर थिरकते रहे।
पुजारी जोशी परिवार के सदस्यों ने तड़के 4.15 बजे पूजन-अभिषेक किया। सुबह 6 बजे आरती के बाद आभ्यंतर श्रंगार और स्वर्ण आंगी धराई गई। सुबह 11.30 बजे हवन व ध्वजारोहण का कार्यक्रम हुआ।
सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध : बोहरा गणोशजी मंदिर में भक्तों की संख्या को ध्यान में रखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए। सादे वेश में भी पुलिस के जवान मंदिर के आसपास और मेला स्थल पर निगरानी रखे थे।
गणेश की उत्सवी प्रतिमाएं स्थापित
गणेश चतुर्थी के मौके पर महाराष्ट्र भवन, घंटाघर, देहलीगेट, बोहरा गणोश सहित विभिन्न मोहल्लों में विनायक विग्रहों की स्थापना के साथ ही दस दिवसीय गणेशोत्सव की शुरुआत हुई। बुधवार को शुभ मुहूर्त में गणोश प्रतिमाओं को बाजे-गाजे के साथ ले जाकर स्थापित किया गया।
कई उत्साही श्रद्धालु मिनी मेटाडोर, लोडिंग टेंपों में प्रतिमाओं को ले गए। प्रतिमाओं को समारोह स्थल तक ले जाते समय गणपति बाप्पा मोरिया के उद्घोष ने शहर के माहौल को गणोशमय बना दिया।