नई दिल्ली.समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव परमाणु करार को लेकर दुविधा महसूस कर रहे है। समा प्रमुख का कहना है कि वाशिगटन पोस्ट में जो समाचार है वह कुछ और कह रहा है और देश के विदेश मंत्री कुछ और कह रहे है इसलिए हमारे सामने दुविधा की स्थिति है।
मतलब साफ है कि परमाणु करार पर मुलायम का मन फिर बदल सकता है और अगर ऐसा होता है तो यह यूपीए सरकार और कांग्रेस के लिए बड़ा सकंट हो सकता है। इस लिहाज से अगर एनएसजी की बैठक में सदस्य देश भारत के लिए कुछ पाबंदी की शर्त लगाने की सिफारिश करते है तो यह सरकार और उनकें सहयोगी दल सपा के लिए फैसला करने में थोड़ी मुश्किल आ सकती है । यूपीए सरकार अब ऐसी स्थिति में नहीं है कि वह अपने और सहयोगियों को नाराज कर कोई बड़ा राजनैतिक फैसला कर सके ।
क्या कहना है सरकार का
सरकार का कहना है भारत 123 समझौते के अनुसार चल रहा है और वह अमेरिका में चल रहे उसके भीतरी मामलों से कोई सरोकार नहीं रखती है।
नौ माह पुराना है बुश का पत्र
बुश के जिस पत्र से यह विवाद पैदा हुआ है वह नौ माह पुराना है जो उन्होंने अमेरिकी संसद की प्रतिनिधि सभा के विदेश मामलों के अध्यक्ष हार्वड बर्मन को लिखा था।
क्या कहता है यह पत्र
इस पत्र की भाषा के अनुसार परमाणु करार के समझौते में इस बात का स्पष्ठ उल्लेख है कि अगर भारत परमाणु परीक्षण करता है तो उस स्थिति में अमेरिका ..
1 भारत के साथ परमाणु व्यापार तुरंत रोक देगा
2 भारत को संवेदनशील परमाणु तकनीकी भी देना बंद कर देगा ।