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मां के शव के साथ एक रात

पटना. नागो शर्मा की आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। वह बाढ़ के भंवर को चीरकर अपनी मां को कंधे पर लिए अस्पताल तो पहुंच गया लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

डॉक्टरों ने उसकी 70 वर्षीया मां भगीनिया देवी को मृत घोषित कर दिया, लेकिन धरती पर ईश्वर के दूसरे अवतार कहे जाने वाले डॉक्टरों के बर्ताव ने मानवता को शर्मसार कर दिया।

नागो शर्मा की कहानी शुरू होती है, उसके गांव अमौना से जो सहरसा शहर से लगभग 40 किमी दूर है। इस गांव के सारे घर जलमग्न हो चुके हैं। ऊंची जगहों पर बने पक्के मकानों के ऊपर मचान बनाकर कुछ परिवार जान बचाए हुए हैं और नागो की मानें तो अभी तक वहां कोई राहत दल नहीं पहुंचा है। नागो भी अपनी बूढ़ी मां के साथ घर की छत पर त्रिपाल डालकर किसी मदद का इंतजार कर रहा था।

सब्र टूटा :

शुरू के कुछ दिन तो चूल्हे जलाने लायक लकड़ी मिल गई लेकिन जब वो भी खत्म हो गया तो जीने के लिए कच्च धान खाने के सिवा कुछ नहीं बचा था। नागो शर्मा बताते हैं, मैं तो किसी तरह बर्दाश्त कर रहा था, लेकिन मेरी मां की हालत खराब होती गई। अंत में मैंने उसे कंधे पर बिठाकर बाहर निकालने का फैंसला किया । कंधे पर आगे चलते-चलते एक नाव वाला मिला, लेकिन उसने दो हजार रुपए की मांग की। मैंने इलाज के लिए रखे पैसों में से दो हजार उसे दिए और किसी तरह जीरो माइल पहुंचा।

जीरो माइल से सूमो भाड़ा कर वह मंगलवार शाम सहरसा सदर अस्पताल पहुंचा, लेकिन इमरजेंसी वार्ड में घुसते ही डॉक्टरों ने मां को मृत घोषित कर दिया। नागो कहते हैं, यदि समय से राहत दल आ जाता तो मां बच जाती।

खाने के अभाव में मां मर गई।

नागो बताते हैं , मैंने डॉक्टरों से लाख मिन्नत की कि एक बार तसल्ली कर लो, मां को ठीक से देख लो लेकिन डॉक्टरों ने कहा कि अस्पताल के बाहर बैठो कल देखेंगे। जब ये खबर कुछ पत्रकारों तक पहुंची तो मैं भई ुनके साथ अस्पताल पहुंचा लेकिन डॉक्टरों ने कुच भी कहने से मना कर दिया। फिर नागो शर्मा को लेकर कुछ लोग स्थानीय थाने पहुंचे ताकि पूरे मामले की एफआईआर दर्ज कराई जाए। लेकिन थनेदार राजेशवर सिंह का रवैया तो डॉक्टरों से कहीं अदिक कड़ा था। जब लोगों ने उनसे पूछा कि पुलिस शव की सुरक्षा के लिए कुछ क्यों नहीं कर सकती तो उनका जवाब था, अरे अस्पताल की माचरुरी में तो शव को कुत्ते नोच डालेंगे , इससे बेहतर है कि वह बाहर ही पड ़ा रहे।

पुलिस तो नहीं आई लेकिन सिसी तरह स्थानीय लोगों ेक सहयोग से नागो की मां के अंतिम संस्कार की व्यवस्था की गई। भगीनिया देवी तो इस दुनिया से चली गई लेकिन ये सवाल छोड गई कि उनकी मौत भूख से हुई या आदिकारिक भाषा में किसी बीमारी से..।





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