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लड़की-से शर्मीले, पर संजीदा थे अमिताभ

करनाल.कॉलेज के दिनों में महानायक अमिताभ बच्चन लड़कियों जैसे शर्मीले जरूर थे, लेकिन काम के प्रति उनकी संजीदगी और विनम्रता से लगता था कि एक दिन वे ऊंचे मुकाम पर होंगे। नैनीताल के शेरवुड कॉलेज में अमिताभ के भौतिकी के अध्यापक रहे नोएल थियोफिलेस (82) ने इस बात का खुलासा किया है।

पुराने दिनों को याद करते हुए उन्होंने बताया कि शर्मीले होने के बावजूद अमिताभ सांस्कृतिक समारोह में बढ़चढ़कर भाग लेते थे। नोएल इस कॉलेज में 1956 से 1959 तक अमिताभ के अध्यापक रहे थे।

फिलहाल वे करनाल के एशियन चर्च में रहते हैं। वे मानते हैं कि अमिताभ को पढ़ाना उनके जीवन की उपलब्धि बन गया है।

पढ़ाई में औसत :

नोएल ने बताया कि पढ़ाई में अमिताभ औसत थे, लेकिन नाटकों में उनका प्रदर्शन अव्वल था। कॉलेज में अमिताभ की एक नाटक मंडली हुआ करती थी।

पिता का प्रभाव :

नोएल के मुताबिक, अमिताभ पर उनके पिता हरिवंश राय बच्चन का गहरा असर था। पिता के संस्कार उनमें कूट-कूट कर भरे थे। पिता से जुड़ाव का इस बात से पता लगता है कि वे हर समारोह में उनकी मधुशाला का कुछ अंश जरूर पढ़ते थे।

नहीं भूला आपको :

नोएल ने बताया कि जून 2008 में कॉलेज की स्वर्ण जयंती समारोह में अमिताभ बच्चन मुख्य अतिथि के रूप में आए थे। इस मौके पर उन्होंने नोएल को गले लगाकर कहा, ‘सर, आपकी सीख कभी नहीं भूला।’

1956 में नैनीताल के शेरवुड कालेज में अमिताभ सहित कबीर बेदी, दिलीप ताहिल, मिश्रान व कई संगीतकारों को पढा़ने वाले टीचर नोयल थियोफिलेस का निवास करनाल के एशियन चर्च में है। यहां चर्च सोसाइटी में कोषाध्यक्ष सहित कई पदों पर रहे थियोफिलेस कुछ समय से दिल्ली में अपनी पत्नी का इलाज करवा रहे हैं।

दिल्ली में फोन पर हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि जीवन की उपलब्धि बन गया है अमिताभ को पढ़ाना। अमिताभ 1956 से 1959 तक शेरवुड कालेज नैनीताल में उनके फिजिक्स के स्टूडेंट रहे हैं। ये एक ऐसा कालेज था, जिसमें स्टूडेंट्स के पेपर इंग्लैंड में चेक होते थे।

पिता से संस्कार सीखे अमिताभ ने :

थियोफिलेस बताते हैं कि अमिताभ बच्चन पर अपने पिता का बहुत असर था। वे उनकी कविताएं तो पढ़ते ही थे, उनके संस्कार भी ग्रहण किए थे उन्होंने। जब उसके पिता मुझे कहते थे कि कैसा चल रहा है अभि, तो मैं कहता था कि ठीक है। अमिताभ के छोटे भाई अजिताभ ने भी इसी कालेज में शिक्षा पाई थी।

आनंद फिल्म देखी थी स्टूडेंटस के संग :

अमिताभ की आनंद फिल्म मैने स्टूडेंट्स के संग देखी थी। उसके बाद मैने उसकी कोई फिल्म नहीं देखी, लेकिन सुनता रहा कि उसकी बहुत-सी फिल्में बहुत अच्छी रहीं।

कहा था—आप जैसा टीचर सबको मिले

नैनीताल शेरवुड कालेज के जून 2008 में मनाए गए स्वर्ण जयंती समारोह में अमिताभ बच्चन बतौर मुख्य अतिथि आए और वहां वे मुझे झप्पी डालकर मिले। उनकी आंखों में आंसू थे, बोले कि मैं आपकी दी हुई कोई भी सीख नहीं भूला हूं, गुरुजी आपने कहा था कि कभी मेहनत से जी न चुराना, हमेशा आगे बढ़ना, संकट से मत घबराना, संकट तुम्हें सिखाएंगे, मैं संकटों से जूझता गया और आपके आशीर्वाद से आगे बढ़ाता गया। मैं चाहता हूं कि आपके जैसा टीचर सबको मिले।





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