अजमेर. अजमेर-जयपुर छह लेन एक्सप्रेस हाइवे निर्माण के दौरान काटे गए पेड़ों की संख्या में गोलमाल और बेची गई लकड़ी में अनियमितता की आशंका जताई जा रही है।
जयपुर निवासी मंजू सुराणा ने काटे गए पेड़ों व बेची गई लकड़ी का सूचना के अधिकार के तहत पूरा ब्यौरा मांगा है। लेकिन, एक महीने बाद उन्हें सही सूचना नहीं मिल पाई है। मंजू ने अब मामले की जांच की मांग की है।
मंजू ने गुरुवार को ‘भास्कर’ को फोन पर बताया कि उन्होंने निदेशालय को सूचना के अधिकार के तहत आवेदन दिया था। उन्होंने वर्ष 2002-03 में हाइवे निर्माण के दौरान काटे गए पेड़ों की संख्या और काटने के लिए प्रस्तावित पेड़ों की संख्या का ब्यौरा मांगा था। साथ ही बेची गई लकड़ी का ब्यौरा पूछा था। महकमे के अफसर सूचना उपलब्ध कराने में आनाकानी कर रहे हैं। केवल अजमेर रेंज द्वारा उपलब्ध कराई सूचना को सही मानें तो महकमे ने केवल 1 हजार 274 पेड़ काटने प्रस्तावित बताए हैं, लेकिन काटे गए मात्र 796 पेड़।
इनमें से ये पेड़ किस प्रजाति के हैं और कितनी लकड़ी बेची गई, इसका ब्यौरा नहीं दिया गया है। इधर, निदेशालय से प्राप्त जानकारी के मुताबिक जयपुर से किशनगढ़ तक लगभग 12 हजार 64 पेड़ काटे गए। इन पेड़ों से 83 हजार 457 क्विंटल जलाऊ और 21 हजार 23 क्विंटल टिंबर के उपयोग में आने वाली लकड़ी बेची गई।
महकमे के सूत्रों के पेड़ों की कटाई व नीलामी महकमे की इकाई बीकानेर व्यापार मंडल के अफसरों ने कराई थी। लगभग सौ किलोमीटर लंबे एक्सप्रेस वे पर कटाई के लिए प्रस्तावित और काटे गए पेड़ों, बेची गई लकड़ी से प्राप्त राशि की सूचना ‘भास्कर’ ने बीकानेर डीएफओ राजीव चतुर्वेदी से मांगी तो उन्होंने यह उपलब्ध कराने से फिलहाल इंकार कर दिया।
जो सूचना थी, भेज दी
एक्सप्रेस वे का कार्य मेरी ज्वाइनिंग से लगभग पांच साल पूर्व का है। यहां के रिकॉर्ड के आधार पर जो सूचनाएं उपलब्ध थीं, वह सुराणा को भेज दी र्गई। पिछले अफसरों ने कम पेड़ काटने का कारण यह बताया है कि पहले यहां कार्य किशनगढ़ रेंज की बावड़ी नर्सरी तक कराया जाना प्रस्तावित था। लेकिन, उसे कुछ दूरी पहले ही पूरा कर लिया गया। इसके चलते 1264 की जगह 796 पेड़ ही काटे गए।
- केसी मीणा, डीएफओ, अजमेर मंडल