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उपवास की परंपराओं का निर्वहन

चूरू. जिले भर में जैन समाज का सबसे बड़ा पर्व संवत्सरी गुरुवार को धूमधाम से मनाया गया। शहर में समाज के लोगों ने घरों में जप, तप व उपवास की परंपराओं को निभाते हुए संवत्सरी पर्व मनाया। कमल कुंज में हुए संवत्सरी पर्व के मुख्य कार्यक्रम में साध्वी मानकुमारी ने कहा कि गृहस्थ जीवन के साथ धार्मिक परंपराओं का निर्वहन भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि संवत्सरी के अवसर पर की जाने वाली तपस्या के जरिए न केवल व्यक्ति की आत्मशुद्धि होती है, वहीं मोक्ष की भी प्राप्ति होती है। कार्यक्रम में सभा के अध्यक्ष सुरेश बैद, सचिव तेजपालसिंह गुर्जर, तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष शांतिलाल बैद, सचिव संजय बरड़िया, हेमंत बैद, सुरेंद्र पारख, विवेक सुराणा, संजय कोठारी, विकास पारख, आशीष बैद, संपतमल कोठारी, हनुमान कोठारी व राजेंद्र कोठारी के अलावा दिगंबर समाज के महावीर सीकरिया, बृजेंद्र जैन व सुरेश सरावगी सहित बड़ी संख्या में महिला, पुरुष व बच्चे उपस्थित थे। पर्व को लेकर समाज के लोगों ने अपने अपने प्रतिष्ठानों पर अवकाश रखा। पर्व को लेकर शुक्रवार को क्षमायाचना दिवस मनाया जाएगा। इस दिवस के साथ ही पयरुषण पर्व का भी समापन हो जाएगा।

लाडनूं. ऋषभद्वार सभागार में बुधवार को तपोभिनंदन समारोह हुआ। समारोह में साध्वी कमलप्रभा ने कहा कि आत्मा को पवित्र बनाने का सुगम मार्ग है तप। तप से हम अपनी ईच्छाओं पर काबू पाकर दुष्कर्मो से दूर रहकर मोक्ष प्राप्ति के मार्ग पर अग्रसर हो सकते हैं। उन्होंने तप के बल पर प्रकाश डालते हुए भगवान महावीर के कथनों को रेखांकित किया।

कार्यक्रम में 38 दिनों का निराहार तप करने वाले तपस्वी उम्मेदसिंह सिंघी व संपतदेवी सुराणा का तपोभिनंदन किया गया। इस अवसर पर दोनों तपस्वियों को जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा द्वारा साहित्य भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ तेरापंथ महिला मंडल की कार्यकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत मंगलाचरण से हुआ।

समारोह में चांदमल सुराणा, मेघराज खटेड़, माणकचंद बांठिया, सुनील बोथरा, प्रकाश सिरोहिया, दीपचंद सुराणा, कंचनलता शर्मा, सुरेशकुमार मोदी व कमला कठोतिया ने भी विचार व्यक्त किए। इसके अलावा लक्ष्मीपत बैंगाणी, साध्वी चांदकुमारी ने गीतिकाओं से तप व साधना करने वालों का अभिनंदन किया। संपतराज गोलछा व प्रकाश सिरोहिया ने व्यक्तिगत रूप से भी अभिनंदन किया। कार्यक्रम में तेरापंथ कन्या मंडल, किशोर मंडल व युवक परिषद के कार्यकर्ताओं के अलावा बड़ी संख्या में जैन श्रावकजन उपस्थित थे।

राजलदेसर. कस्बे के वृद्ध साध्वी सेवाकेंद्र में हुए संवत्सरी महापर्व के अवसर पर साध्वी धनश्री ने कहा संवत्सरी का दिन आत्म अवलोकन का दिन है। वर्षभर में हुई भूलों और दूसरे के प्रति किए गए कठोर व्यवहार के लिए क्षमा मांगकर मित्रता बढ़ाने का दिन है। उन्होंने कहा जहां बैर भावना से जीवन मे कटुता और कलुषता पैदा होती है, वहीं क्षमा से प्रेम का विकास संपूर्ण विश्व को मैत्री के सूत्र में बांधकर विश्व बंधुत्व की भावना की ओर अग्रसर करता है। साध्वी धनश्री, साध्वी शीलयशा, सलिलयशा, कुमुमयशा आदि ने सुबह आठ से शाम पांच बजे तक चले संवत्सरी व्याख्यान के तहत भगवान महावीर के जीवन चरित्र, चंदन बाला के व्याख्यान, र्तिथकर महावीर के बाद उत्तरवर्ती आचार्यो की परंपराओं का वाचन किया गया।

इस अवसर पर चौविहार उपवास, अष्ट प्रहरी, छह प्रहरी और चार प्रहरी पौषध किए गए। रात्रिकालीन कार्यक्रम में ज्ञान वर्धक प्रतियोगिताएं हुई। कन्यामंडल द्वारा अंजना सती व दहेज पर रोचक परिसंवाद प्रस्तुत किया गया। कौन बनेगा ज्ञानवान प्रतियोगिता में प्रथम स्थान रिंकु बैद, द्वितीय ममतादेवी कुंडलिया व तृतीय स्थान विजयलक्ष्मी बेगवानी ने प्राप्त किया। पयरूषण महापर्व के दौरान चले नमस्कार महामंत्र के अखंड जप का समापन गुरुवार को सुबह ८.१५ बजे किया गया। अखंड जप के सफल संचालन में शांतिलाल बैद, राजूभाई, अभिनव बैद, पारस चिंडालिया, लक्ष्मीपत कुंडलिया, विनित, सुमित, विकास, दीपक, मोहित दूगड़ आदि ने सहयोग किया। शुक्रवार को सुबह ६.३क् बजे साध्वी प्रवास स्थल पर सामूहिक खमतखमणा कार्यक्रम होगा। रविवार को अणुव्रत समिति की ओर से सम्मान समारोह होगा।

क्षमापना दिवस आज
लाडनूं. जैन धर्मावलंबियों का क्षमापना दिवस शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस अवसर पर जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा के तत्वावधान में ऋषभद्वार भवन में क्षमयाचना कार्यक्रम होगा। दीपचंद सुराणा ने बताया कि सुबह छह बजे होने वाले कार्यक्रम में साध्वी कमलप्रभा के सानिध्य में विश्व के समस्त जीवों से क्षमा याचना की जाएगी।

जुलूस निकाला
लाडनूं. तप करने वाले उम्मेदसिंह सिंघी व संपतदेवी सुराणा द्वारा तप करने पर उनका स्वागत जुलूस निकाला गया। तपस्वी के घर से शुरू हुए जुलूस में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। जुलूस नगर के प्रमुख मार्गो से होते हुए जैन विश्वभारती पहुंचा। मुनि महेंद्रकुमार के दर्शनोपरांत जुलूस पहली पट्टी स्थित ऋषभद्वार पहुंचा।





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