जोधपुर.
जोधपुर का सिरमौर हस्तशिल्प निर्यात का व्यवसाय इन दिनों संकट के दौर से गुजर रहा है। पिछले पांच माह में हस्तशिल्प निर्यात करीब 25 प्रतिशत कम हो चुका है, यदि यही हालात रहे तो इस उद्योग से जुड़ी इकाइयों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।
शहर से हर वर्ष करोड़ों का हस्तशिल्प निर्यात होता है। पिछले वर्ष डॉलर के भाव के लगातार उतार चढ़ाव व लोहे के भावों में भारी बढ़ोतरी के कारण यह इस उद्योग की स्थिति बिगड़ गई थी। जिसके चलते पिछले वर्ष करीब 300 करोड़ रुपए का निर्यात घट गया था।अब डॉलर के स्थिर होने के बावजूद हस्तशिल्प निर्यात में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई, बल्कि इस व्यापार की हालत इस वित्तीय वर्ष में और खस्ता हो गई है।
पिछले वर्ष अगस्त माह तक हस्तशिल्प का निर्यात करीब 450 करोड़ था, लेकिन इस वित्तीय वर्ष में अगस्त माह तक लगभग 340 करोड़ का ही निर्यात हुआ है। यह निर्यात पिछले वर्ष के मुकाबले 110 करोड़ रुपए कम है। जबकि वर्ष 2006 में अप्रैल से अगस्त माह के अंत तक करीब 10581 कंटेनर निर्यात हो चुके थे। इसी तरह वर्ष 2007 के अप्रैल से अगस्त माह के अंत तक 11244 कंटेनर निर्यात हुए। लेकिन इस वर्ष इन पांच माह में निर्यात होने वाले कंटेनरों की संख्या घट कर 8562 रह गई है।
अमेरिका में मंदी की परेशानी
जोधपुर से होने वाले कुल निर्यात का ज्यादातर हिस्सा अमेरिका जाता है। पिछले दो वर्षो से वहां मंदी का दौर चल रहा है। इसके चलते डॉलर के भावों में भी उतार चढ़ाव देखने को मिला। अमेरिका में निर्यात घटने का भी यहां के निर्यात पर असर पड़ा है।
छोटे दस्तकारों की कमी
वैट के प्रावधानों राज्य के बाहर से आने वाली लकड़ियों पर 12.5 प्रतिशत वैट लगाया गया है। वहीं इस कच्चे माल पर 1.6 प्रतिशत मंडीकर भी लगाया जा रहा है, जबकि पहले लकड़ी पर डी फार्म के विरुद्ध ४ प्रतिशत कर ही देना पड़ता था। इससे कई छोटे दस्तकारों ने काम बंद कर दिया है।
लोहे के भाव में वृद्धि
पिछले एक वर्ष में लोहे के भावों में जबरदस्त वृद्धि हुई है निर्यात होने वाले माल में 30 प्रतिशत माल लोहे का निर्यात होता है। लोहे के भाव पिछले एक वर्ष में लगभग दुगने हो चुके है। इसके चलते यहां का हस्तशिल्प निर्यातक आयरन हैंडीक्राफ्ट में पिछड़ गया है।
रिफंड की व्यवस्था नहीं
केंद्र सरकार के वाणिज्य मंत्रालय ने आयात निर्यात नीति में यह प्रावधान रखा था कि निर्यातक के कंटेनर पर लगने वाले टर्मिनल हैंडलिंग चार्ज व पोर्ट तक माले के पहुंचने तक लगने वाले भाड़े के सर्विस टैक्स को रिफंड किया जाएगा। केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग ने यह रिफंड अभी तक नहीं दिया है।
पेट्रोलियम पदार्थो के बढ़े भाव
इस एक वर्ष में पेट्रोलियम उत्पादों के भावों में काफी वृद्धि हुई है। जिसके चलते ट्रांसपोर्टेशन भी महंगा हो गया है। इन उत्पादों के भाव के साथ रंग, केमिकल तथा अन्य उत्पादों के भावों में भी वृद्धि हुई। जिससे उत्पाद की लागत पर काफी प्रभाव नजर आया है।
जोधपुर के हस्तशिल्प निर्यात को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास किए जाने चाहिए। निर्यातकों के कंटेनर के टर्मिनल हैंडलिंग चार्जेज व पोर्ट तक के भाड़े के सर्विस टैक्स रिफंड के प्रावधान के तहत शीघ्र ही रिफंड की व्यवस्था की जानी चाहिए।
—डा. भरत दिनेश, सचिव, हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन
हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट से शहर के करीब 25 हजार दस्तकार परिवार जुड़े हुए है। राज्य सरकार के वैट लगाने के बाद कई दस्तकारों का कार्य मरणासन्न की स्थिति में आ गया है। निर्यात को बचाने के लिए लकड़ी पर वैट समाप्त करने की जरूरत है।
—कनकमल डागा, उपाध्यक्ष, हैंडीक्राफ्ट टिंबर इंडस्ट्रीज एसोसिएशन