इंदौर. एमआर-9 (इलेक्ट्रॉनिक कॉम्प्लेक्स से बायपास) बनाने में अड़ रहे 171 पेड़ भी कटने वाले हैं। नगर निगम और विकास प्राधिकरण ने इसकी तैयारी कर ली है। निगम तो इन्हें बेचकर भी कमाई करेगा। इसके साथ ही यह सवाल फिर उठ रहा है कि काटने के बजाय ट्रांसप्लांट करने पर विचार क्यों नहीं किया जाता।
प्राधिकरण ने 6.5 किलोमीटर लंबे इस मेजर रोड का निर्माण अक्टूबर 07 में शुरू किया है जिस पर करीब चालीस करोड़ रुपए खर्च होंगे। 30 से 40 मीटर चौड़ा यह रोड इलेक्ट्रॉनिक्स कॉम्प्लेक्स, बजरंगनगर, संजय गांधीनगर, एबी रोड, रिंगरोड होते हुए बायपास तक बनेगा। प्राधिकरण ने निगम से निर्माण में बाधक पेड़ काटने की मांग की थी।
निगम ने सर्वे में पाया संजय गांधीनगर से रिंगरोड तक 171 पेड़ कटेंगे। उद्यान अधिकारी ए.यू. खान के मुताबिक कटाई के टेंडर बुलाए जा रहे हैं। काटने वाला ही पेड़ भी ले जाएगा। कटने वालों में एक भी पेड़ फलदार नहीं है।
ठेकेदार की आपत्ति
3 अगस्त को एआईसीटीएसएल कार्यालय में हुई समीक्षा बैठक में प्राधिकरण पदाधिकारियों ने काम की गति पर सवाल उठाया तो ठेकेदार कंपनी ने दस महीने से बाधक निर्माण और पेड़ नहीं हटाने पर आपत्ति दर्ज कराई। तब कलेक्टर ने प्राधिकरण को निगम से समन्वय कर पेड़ कटवाने के निर्देश दिए।
ट्रांसप्लांट क्यों नहीं?
171 पेड़ों को मृत्युदंड देने के फरमान के साथ इन्हें ट्रांसप्लांट करने की बहस भी जोर पकड़ रही है। पहले भी कई पेड़ ट्रांसप्लांट करने के बाद फिर हरे-भरे हो चुके हैं। हालांकि इस पर कोई जवाबदार अफसर कुछ भी कहने को तैयार नहीं।