इंदौर. एमजीएम मेडिकल कॉलेज में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को नियमित करने का मामला इंदौर-भोपाल के बीच उलझा है। कॉलेज प्रशासन भोपाल से मार्गदर्शन मांगता है और वहां से लिख देते हैं इंदौर में ही तय कर लें।
राज्य सरकार ने अलिपिकीय पदों पर रखे संविदा कर्मचारियों को नियमित करने के आदेश दिए थे। मेडिकल कॉलेज में ऐसे 50 कर्मचारी हैं। इन्हें नियमित करने के लिए कॉलेज प्रशासन लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तृतीय श्रेणी अलिपिकीय भर्ती नियम 1989 लागू करता है लेकिन उसमे टेक्नीकल सुपरवाइजर, इलेक्ट्रिक सुपरवाइजर एवं फिजिकल सुपरवाइजर के पद नहीं हैं। इसी कारण मेडिकल कॉलेज ने मामला अटका दिया।
प्रभावित कर्मचारियों का कहना है ये पद भर्ती नियम में नहीं हैं तो रखा किस आधार पर। मेडिकल कॉलेज ने 2002 में विज्ञप्ति निकालकर इन पदों के आवेदन मंगवाए थे। उसमें अलिपिकीय पदों पर आवेदन बुलवाए गए थे। शासन से अलिपिकीय पदों को नियमित करने के आदेश मिलने के बाद भी कॉलेज प्रशासन हर पद के लिए शासन को लिख देता है। वहां से कई बार बताया जा चुका है मामला कॉलेज के अधिकार क्षेत्र का है इसलिए बार-बार मार्गदर्शन न मांगें।
मध्यप्रदेश पेरामेडिकल एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष करण भगत ने बताया चार कर्मचारियों को नियमित किया तो वरीयता का ध्यान नहीं रखा। डीन डॉ. अशोक वाजपेयी के मुताबिक सभी वर्ग के कर्मचारियों के भर्ती नियम हैं। जो इस दायरे में नहीं आ रहे हैं उनके बारे में शासन को लिखा है। नियमित करने की प्रक्रिया चल रही है।