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सुरक्षा ढीली-ढाली

बिलासपुर. हाईकोर्ट में लगभग दो साल से लागू की गई सुरक्षा व्यवस्था में अब बदलाव की जरूरत महसूस की जाने लगी है। यह पहली घटना नहीं है, जब हाईकोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था की कलई खुली है। इसके पहले भी यहां पर अवांछित लोगों के घुसने की घटनाएं हो चुकी हैं।

हाईकोर्ट में गुरुवार को हुए सुतली बम (दीपावली में जलाए जाने वाले तेज आवाज के पटाखे) के धमाके ने यहां की सुरक्षा व्यस्था के परखच्चे उड़ा दिए हैं। आज वकील इस बात के लिए शुक्र मनाते दिखे कि गनीमत है सुतली बम ही थे, कुछ और नहीं।

हाईकोर्ट में वकील, क्लाइंट और अधिकारियों को मिलाकर पांच सौ से ज्यादा लोग रोज आना-जाना करते हैं। इन सब की चेंकिंग करने की सिर्फ औपचारिकता निभाई जाती है। प्रतिदिन आने वाले वकील, मुंशियों को यहां के सुरक्षाकर्मी पहचानते हैं। इस कारण उन्हें हर बार रोकना न संभव है और न ही व्यवहारिक। जहां तक बाहर से आने वालों की बात है, तो उनके लिए लगभग दो साल से पास बनवाने की व्यवस्था की गई है। इसमें व्यक्ति का नाम, पता आदि का उल्लेख किया जाता है। यह पास सुरक्षाकर्मी बनाते हैं और इसे दिखाकर कोई भी हाईकोर्ट में प्रवेश पा सकता है।

सुरक्षाकर्मी किसी भी व्यक्ति की तब तक तलाशी नहीं लेते, या अंदर जाने से नहीं रोकते, जब तक मामला संदिग्ध न लगे। यहां कार्यरत सुरक्षा अधिकारी कर्मचारियों का मानना है कि आमतौर पर लोग हाईकोर्ट अपने मामलों की संबंध में आते हैं और उनसे ज्यादा पूछताछ या छानबीन करना व्यवहारिक भी नहीं लगता।

यहां पर लगभग 80 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। इनमें एक डीएसपी व दो टीआई रैंक के सुरक्षा अधिकारी भी शामिल हैं। मुख्य द्वार पर चार सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। एक कर्मचारी पास बनाने के लिए नियुक्त है। वहीं हाईकोर्ट परिसर के सभी दफ्तरों, कोर्ट बिल्डिंग के सभी मुख्य द्वारों और कोर्ट रूम के आसपास भी सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं, जो आने-जाने वालों पर निगाह रखते हैं, लेकिन इनके पास यह पता लगाने के लिए कि व्यक्ति के पास कोई हथियार या संदिग्ध वस्तु तो नहीं है, न मेटल डिक्टेटर है और न ही दूसरा कोई साधन। आमतौर पर उनकी जेब आदि की तलाशी भी नहीं ली जाती।

अब तक हो चुकी घटनाएं
लगभग दो साल पहले एक मामले में न्याय की गुहार करते हुए खून से लथपथ एक व्यक्ति हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के कोर्ट में घुस गया था। जज ने उसकी बात सुनने के बाद कोतवाली पुलिस को बुलाकर उसके प्रकरण को निपटाने का आदेश दिया था, लेकिन इसके बाद हाईकोर्ट में सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने की जरूरत महसूस की जाने लगी थी। इसी कारण यहां पर सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए। इसके बाद भी गाहे-बगाहे ऐसी घटनाएं घटती रही हैं।

इनमें एक आदिवासी युवक द्वारा धनुष-बाण लेकर न्याय की गुहार करते हुए घुसने की कोशिश भी शामिल है। हालांकि उसे रोक लिया गया और उसके मामले में कार्रवाई के निर्देश भी तत्कालीन रजिस्ट्रार जनरल एचएस मरकाम ने दिए थे। इसके बाद रायपुर से एक मामले में उपस्थित होने के लिए पहुंचा डीएसपी शराब के नशे में पाया गया। यह पिछले महीने की ही बात है। महाधिवक्ता कार्यालय के आसपास घूम रहे इस व्यक्ति को पुलिस के हवाले कर विभागीय कार्रवाई के लिए लिखा गया था।





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