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‘मिनी जू’ की मान्यता खटाई में

बिलासपुर. कानन पेंडारी के मिनी जू की मान्यता खटाई में पड़ गई है। जू अथारिटी आफ इंडिया की टीम अभी तक निरीक्षण करने नहीं आई है, जबकि कानन पेंडारी को दी गई मिनी जून की अस्थाई मान्यता की समयावधि समाप्त हो चुकी है।

वन विभाग ने इस मामले में लापरवाही बरती और सेंट्रल जू अथारिटी आफ इंडिया से इसके लिए संपर्क नहीं किया। नतीजतन विभाग के अधिकारियों व टीम के बीच संपर्क नहीं हो सका और समयावधि समाप्त हो गई। उल्लेखनीय है कि दो साल पहले कानन पेंडारी को मिनी जू की अस्थाई मान्यता जू अथारिटी आफ इंडिया द्वारा प्रदान की गई थी।

इसके बाद केवल एक बार टीम निरीक्षण करने के लिए आई, तब उन्होंने वन विभाग को नौ बिंदुओं को पूरा करने की सलाह दी थी, ताकि मिनी जू की स्थाई मान्यता दी जा सके। इसके अंतर्गत कानन पेंडारी में अतिरिक्त चीतलों की शिफ्ट करने, बाथरूम की सीढ़ी में रैंप बनाने, पूर्णकालिक वेटनरी डाक्टर व पूर्णकालिकप्रभारी की नियुक्ति करने सहित कुछ अन्य सलाह दी गई थी।

वन विभाग ने नौ बिंदुओं को पूरा कर लिया और इस संबंध में सेंट्रल जू अथारिटी आफ इंडिया को जानकारी भी भेज दी, लेकिन टीम नहीं आई और समयावधि समाप्त हो गई। जानकारों की मानें तो मिनी जू की अस्थाई मान्यता अभी समाप्त नहीं हुई है, लेकिन स्थाई मान्यता खटाई में नजर आ रही है। इस मामले में कानन पेंडारी के प्रभारी एएस नाथ का कहना है कि छह महीने पहले नौ बिंदुओं में जानकारी तैयार कर भेज दी गई थी।

इसके बाद अगस्त में रिमाइंडर भेजा गया था। जल्दी ही टीम के आने की उम्मीद है। टीम द्वारा निरीक्षण करने के पश्चात कानन पेंडारी को पहले से प्राप्त मिनी जू की अस्थाई मान्यता की अवधि बढ़ा दी जाएगी। टीम के सदस्य अगर पूरी तरह संतुष्ट हो जाते हैं, तो वे जू अथारिटी आफ इंडिया को मिनी जू की स्थाई मान्यता देने के लिए परामर्श दे सकते हैं।





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