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वोटिंग से पहले सीखेंगे वोट डालना!

बिलासपुर. आगामी विधानसभा चुनाव में पीठासीन अधिकारियों को एक नहीं, बल्कि दो बैलेट दिए जाएंगे। लकड़ी के गत्ते से बनाए गए डमी बैलेट यूनिट में मतदाताओं को यह सिखाया जाएगा कि इलेक्ट्रानिंक वोटिंग मशीन में उन्हें वोट कैसे देना है? निर्वाचन आयोग ने अनपढ़ मतदाताओं की परेशानी दूर करने के लिए यह निर्णय लिया है।

चुनावों में ग्रामीण मतदाताओं को इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन से वोट देने में परेशानी होती है। बटन दबाने में गफलत होने के कारण ही बड़ी संख्या में वोट रिजेक्ट कर दिए जाते हैं। यही वजह है कि निर्वाचन आयोग ने इस बार वोटिंग से पहले ऐसे मतदाताओं को जानकारी देने का निर्णय लिया है।

इस बार चुनाव में पीठासीन अधिकारियों को इवीएम के कंट्रोल सिस्टम व बैलेट के अलावा डमी बैलेट भी दिए जाएंगे। जिले के 2001 मतदान केंद्रों में यह व्यवस्था लागू होगी। पीठासीन अधिकारी मतदाताओं को वोटिंग का तरीका बताएंगे। लकड़ी के गत्ते से बनाए गए डमी बैलेट में अलग चुनाव चिन्ह होंगे, वहीं उम्मीदवारों के नाम की जगह काल्पनिक नाम अंकित किए जाएंगे।

इस बैलेट से लोगों को उदाहरण देकर बताया जाएगा कि वोटिंग करने के लिए उन्हें किस तरह बटन दबाना है। राज्य निर्वाचन आयोग का पत्र गुरुवार को पहुंचा। इसमें कहा गया है कि मतदान केंद्रों में रखे जाने वाले डमी बैलेट आयोग द्वारा बनवाए जा रहे हैं, जो जल्द ही सभी जिलों को भेज दिए जाएंगे। यह पहली बार होगा, जब इस तरह की व्यवस्था मतदान केंद्रों में की जाएगी। इससे रिजेक्ट होने वाले मतों की संख्या में भी कमी आएगी। खासकर ग्रामीण क्षेत्र के ऐसे मतदाताओं को इसका लाभ होगा, जो पढ़े-लिखे नहीं हैं।

उल्लेखनीय है कि परिसीमन के बाद जिले की 9 विधानसभा क्षेत्रों में 2001 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, लिहाजा इतनी ही मशीनों का उपयोग वोटिंग के लिए किया जाएगा। जिला निर्वाचन शाखा के पास कुल 2650 इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनें हैं, जिनमें से 100 मशीनें अनिवार्य रूप से ट्रेनिंग के लिए रिजर्व रखा जाएगा। इसके अलावा चुनाव याचिका लंबित होने के कारण लोरमी की 183 व मरवाही की 192 इवीएम सील हैं।

मशीनों की टेस्टिंग शुरू
नेहरू नगर स्थित सामुदायिक भवन में इलेक्ट्रानिक कारपोरेशन इंडिया, हैदराबाद के इंजीनियरों द्वारा इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों की टेस्टिंग शुरू कर दी गई है। यह काम करीब 15 दिनों तक चलेगा।

मशीनों के कंट्रोल सिस्टम व बैलेट में यह देखा जाएगा कि एक वोट डालने के बाद दूसरे वोट के लिए तैयार होने में कितना समय लग रहा है। जिले के पास उपलब्ध इवीएम लगभग पांच वर्ष पुरानी हैं। पुरानी होने के कारण कुछ के बिगड़ने की आशंका भी बनी हुई है। मशीन बिगड़ने की स्थिति में आयोग से अतिरिक्त मशीनों की मांग की जाएगी।





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