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साधना का जीवन स्वयं एक साधना

बिलासपुर. जीवन में कई ऐसे मोड़ आते हैं, जब इंसान को ढेर सारी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना पड़ता है, पर यह भी सच है कि कम लोग ही होते हैं, जो पूरी निष्ठा व ईमानदारी के साथ अपने दायित्व को पूरा कर पाते हैं। ऐसे ही लोगों के बीच अपना स्थान बनाया है शिक्षिका साधना कटकवार ने।

उनका चयन राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए किया गया है। शुक्रवार को नई दिल्ली में महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटील उन्हें राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित करेंगी। कोटा ब्लाक के शासकीय कन्या पूर्व माध्यमिक शाला की प्रधान अध्यापिका पद में रहने से पहले साधना ने शिक्षकीय जीवन के शुरुआती दिनों से ही खुद को इस क्षेत्र के लिए समर्पित कर दिया और अपने साथियों और सहकर्मियों के बीच मिसाल बन गई।

स्व. गिरिजा प्रसाद व रमादेवी कटकवार की पुत्री साधना ने प्राथमिक स्तर की पढ़ाई पुत्री शाला जूना बिलासपुर से की और महारानी लक्ष्मीबाई स्कूल से बोर्ड परीक्षा उत्तीर्ण की। स्नातक की डिग्री शासकीय कन्या महाविद्यालय व स्नातकोत्तर की पढ़ाई सीएमडी कालेज से की। इसके बाद पीजीबीटी कालेज से बीएड किया। हिंदी साहित्य व इतिहास विषय में एमए की डिग्री लेने वाली शिक्षिका ने शासकीय सेवा करते हुए समाज, साहित्य, खेल व सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लिया। खो-खो, बैडमिंटन, कबड्डी आदि खेलों में कई पुरस्कार प्राप्त किए और अंतरराष्ट्रीय बाल वर्ष कार्यक्रम में बच्चों के साथ मप्र का प्रतिनिधित्व किया।

दिल्ली जाने से पूर्व उन्होंने दैनिक भास्कर को बताया कि शासकीय सेवा के दौरान उनका कई बार तबादला हुआ और कई तरह की जिम्मेदारियां दी गई, लेकिन उन्होंने सभी दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन किया। वह आगे बढ़ती गई और पीछे मुड़कर नहीं देखा। महिला बाल विकास विभाग में सुपरवाइजर बनाकर बगीचा ब्लाक के सन्ना सेक्टर में भेजा गया। इसके बाद हाईस्कूल तिवरता में कार्य किया। उन्हें प्रमोशन देकर मिडिल स्कूल रजकम्मा भेजा गया। उन्हें बालिका आश्रम में अधीक्षिका के रूप में दोहरी जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद उनका तबादला शासकीय कन्या शाला कोटा किया गया।

..इसलिए मिल रहा सम्मान
>> राष्ट्रीय कैडेट कोर बालिका डिवीजन की सीनियर विंग का मिला है प्रमाणपत्र
>> दो विषयों में एमए, बीएड उत्तीण
>> पंचायत एवं समाज सेवा आधारताल जबलपुर से प्रशिक्षित
>> राष्ट्रीय जन सहयोग एवं बाल विकास संस्थान लखनऊ से ट्रेनिंग प्राप्त
>> 1982 से 1986 तक राज्य स्तरीय लोकनाटच्य, लोकगीत व लोकनृत्य के लिए सर्वश्रेष्ठ कलाकार के रूप में पुरस्कृत
>> डाक्यूमेंट्री फिल्म ‘ मैने पढ़ लिया’ में प्रमुख भूमिका निभाई
>> महिला स्काट के रूप में देश के 25 से अधिक शहरों में आयोजित राष्ट्रीय एकता शिविर में भाग लिया
>> आकाशवाणी से कहानी व छत्तीसगढ़ी लोकगीतों का प्रसारण
>> नारी सशक्तीकरण, बाल विकास के क्षेत्र में कई उल्लेखनीय कार्य।
>> स्वयं की राशि से कई गरीब बच्चों को पढ़ाया





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