भोपाल. नकली नोट के प्रदेश में बढ़ते प्रचलन को लेकर राज्य सरकार ने पुलिस महानिदेशक की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है। यह समिति केंद्रीय गुप्तचर ब्यूरो (आईबी) के साथ मिलकर नकली नोट के प्रचलन पर नजर रखेगी।
इसमें सहायता के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और सीआईडी के अधिकारी भी रहेंगे। सूत्रों के अनुसार दिल्ली में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आंतरिक सुरक्षा को लेकर आयोजित मुख्यमंत्रियों की बैठक में नकली नोट को लेकर चिंता व्यक्त की थी।
बैठक में राज्यों से इसके लिए गंभीरता से प्रयास करने को कहा गया था। बैठक के बाद मप्र पुलिस ने तात्कालिक तौर पर विशेष शाखा के अधीन काम करने वाली एसटीएफ को नोडल एजेंसी बना दिया था। हालांकि राज्य में पहले से ही नकली नोट को लेकर सीआईडी में एक सेल काम कर रहा है। इसका प्रभारी एक डीआईजी होता है।
जल्द ही होगी बैठक
सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्रियों की बैठक में निर्देश दिए गए थे कि नकली नोट के प्रचलन पर नजर रखने के लिए राज्य स्तरीय समिति का गठन किया जाए। इसके तहत डीजीपी की अध्यक्षता में बनाई गई समिति की जल्द ही पहली बैठक होने वाली है।
एक साल में 18 लाख 18 हजार नकली नोट
सूत्रों का कहना है कि प्रदेश में 2007-08 के दौरान नकली नोट के 61 अपराध हुए। इनमें 101 आरोपियों को पकड़ा गया जिनसे करीब 18 लाख 18 हजार 350 रुपए के नकली नोट मिले। इनमें से 2007 में 36 और जून 2008 तक 25 नकली नोट के अपराध दर्ज किए गए।
जप्त नकली नोट में 10 से लेकर 1000 रुपए तक के नोट थे। बताया जाता है कि वर्ष 2004-05 से 2006-07 की अवधि के दौरान देश में करीब साढ़े छह करोड़ रुपए के नकली नोट पकड़े गए। सूत्र बताते हैं कि भोपाल में हर महीने करीब 90 नकली नोट प्रचलन में आते हैं, जिनमें ज्यादातर 500 और 1000 रुपए के नोट होते हैं। एक साल में तकरीबन 1000 से ज्यादा नोट यहां बाजार में आ जाते हैं।