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मुखर्जी के बयान से एनएसजी में भारत का पक्ष मजबूत

वियना. परमाणु अप्रसार की दिशा में प्रतिबद्धता वाले विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी के बयान के बाद एनएसजी की बैठक में भारत का पक्ष मजबूत हुआ है। इसके बाद परमाणु व्यापार के लिए उसे छूट देने पर आम सहमति की दिशा में शुक्रवार को और प्रगति हुई।

नई दिल्ली में मुखर्जी द्वारा जारी बयान से परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों को सही संकेत मिले, जिन्होंने इसकी सराहना की। वियना में भारतीय विदेश सचिव शिवशंकर मेनन के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल के एनएसजी के 4 असंतुष्ट देशों के प्रतिनिधियों से मिलने के बाद मुखर्जी ने बयान जारी किया।

भारत के इस कदम को इन देशों की चिंताएं दूर करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। गुरुवार रात को ही मेनन व पीएम के विशेष दूत श्याम सरन ने इन देशों के प्रतिनिधियों से मुखर्जी के बयान पर अनौपचारिक चर्चा की थी। शुक्रवार को लंच ब्रेक में इन्होंने मुखर्जी के बयान पर अपनी सरकारों से राय जानने के लिए बात की।

अमेरिका को उम्मीद : लंच ब्रेक से पहले अमेरिकी शस्त्र नियंत्रण कार्यवाहक उप मंत्री जॉन रूड ने बताया, ‘हमें खुशी है कि चर्चा के दौरान सकारात्मक प्रगति हुई है।’

उन्होंने परमाणु अप्रसार के बारे में मुखर्जी के बयान को ‘अति महत्वपूर्ण’ करार देते हुए कहा कि इस पर एनएसजी के सदस्य देशों ने चर्चा की। सदस्यों ने इसका स्वागत किया और प्रशंसा की। अमेरिका ने ‘लक्ष्य’ हासिल करने की उम्मीद भी जताई।

न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रिया, आयरलैंड आदि कुछ देश भारत को छूट देने संबंधी मौजूदा संशोधित मसौदे से असंतुष्ट हैं। उन्होंने खासतौर पर परमाणु परीक्षण के मुद्दे पर बैठक में सवाल उठाए हैं। वे चाहते हैं कि छूट में यह शर्त जोड़ी जाए कि यदि भारत ने परमाणु परीक्षण किया तो परमाणु सहयोग समाप्त कर दिया जाएगा। भारत को इस पर आपत्ति है।

मुखर्जी ने जताई प्रतिबद्धता :

अपने बयान में मुखर्जी ने कहा था कि वह परमाणु अप्रसार और परमाणु परीक्षण पर स्वैच्छा से लगाई गई एकतरफा रोक के लिए वचनबद्ध है। उन्होंने भारत को असैन्य परमाणु सुविधाएं देने से पर्यावरण परिवर्तन की चुनौती से निपटने में मिलने वाली मदद का जिक्र भी किया।

ऑस्ट्रिया अब भी राजी नहीं

ऑस्ट्रिया ने शुक्रवार को कहा है कि एनएसजी से भारत-अमेरिकी परमाणु करार पर हरी झंडी मिलने के लिए आम सहमति बनाने के वास्ते ‘अब भी कुछ काम करने’ की जरूरत है।

ऑस्ट्रिया के विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी पीटर लॉन्स्की ने इस आशय के विचार जताते हुए कहा है, ‘मौजूदा वार्ता तथा मसौदे में कई आयाम जोड़ने की जरूरत है। हम अधिक प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण सुरक्षा ढांचा चाहते हैं।’इस बीच, दूसरे दिन की बैठक के दूसरे दौर के बाद एक पश्चिमी राजनयिक ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि बैठक के नतीजे आश्चर्यजनक हो सकते हैं। ये भारत के पक्ष में या खिलाफ भी हो सकते हैं।





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