अहमदाबाद.एक जैन तपस्विनी लीलाबेन नवीनचंद्र शाह (53) ने एक माह लंबे उपवास के अंतिम दिन गुरुवार को अपनी देह त्याग दी।
इसी दिन सुबह संवत्सरी के मौके पर उन्हें ‘पारणा’ करना था। लीलाबेन को ब्लड प्रेशर कम हो जाने के बाद बुधवार को इंडस अस्पताल में भरती कराया गया था, जहां व्रत तोड़ने के महज कुछ घंटे पूर्व गुरुवार रात उन्होंने अंतिम सांस ली।
उनके रिश्तेदार जसुभाई शाह ने कहा, ‘उनकी मृत्यु बहुत शुभ है।’लीलाबेन नवरत्न सागरसुरीश्वरजी के 110 शिष्यों में से एक थीं। जैन धर्म के विद्वान विपुल शाह ने इसे ‘समाधि मृत्यु’ बताते हुए कहा कि उपवास के तीसवें दिन होने वाली मृत्यु को शुभ माना जाता है।
उधर, जैन मुनि मित्रानंदसागरजी ने कहा, ‘उपवास की एक सीमा जरूर होनी चाहिए।’ उन्होंने कहा कि शारीरिक क्षमता के अनुसार ही हर किसी को व्रत रखना चाहिए। इंडस अस्पताल के डॉ. परेश शाह ने कहा की व्रत तोड़ने के दौरान प्रत्येक ‘तपस्वी’ को द्रव्य पदार्थ लेते वक्त काफी सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘लंबे समय तक व्रत रखने के कारण लीलाबेन के शरीर में जहरीले पदार्थ संचित हो गए थे, जिससे उनकी मौत हुई।’