भोपाल. बरकतउल्ला विश्वविद्यालय की शनिवार को होने वाली कार्यपरिषद की बैठक में बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन और मास्टर ऑफ फिजिकल एजुकेशन के मामले पर महत्वपूर्ण चर्चा की जाएगी।
इस मामले का सबसे खास पहलू यह सामने आ रहा है कि इसमें एक ही सत्र में दो पूर्व कुलपतियों की लापरवाही का खामियाजा वर्तमान कुलपति को तब उठाना पड़ रहा है, जब उन्होने इस मामले की गलतियों को ठीक करने के लिए परीक्षा ही स्थगित कर दी थी। इस मामले में राजभवन द्वारा उच्च शिक्षा सचिव से जांच करवाई गई थी।
जांच रिपोर्ट में कुलपति को लापरवाही का दोषी ठहराया गया है लेकिन ध्यान देने की बात यह है कि इस मामले में पूरे सत्र में तीन कुलपतियों ने अलग अलग स्तर पर फैसले लिए हैं। इस लिहाज से शनिवार की बैठक को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उच्च शिक्षा सचिव द्वारा दी गई जांच रिपोर्ट की अनुशंसाओं पर राजभवन ने कार्यपरिषद को फैसला लेने को कहा है।
शनिवार की बैठक में इसी पर चर्चा होनी है। इस रिपोर्ट की अनुशंसाओं को ध्यान से देखने पर पता चलता है कि कुलपति को प्रशासनिक लापरवाही का दोषी बताया जा रहा है। ऐसे में जब इस मामले से तीन कुलपति जुड़े हों तब कार्यपरिषद के सामने इसकी जिम्मेदारी तय करना भी एक चुनौती के रूप में सामने आ रहा है। दरअसल बीपीएड-एमपीएड में प्रवेश देने के समय पूर्व कुलपति आरएस सिरोही ने निर्देश दिए थे और संबद्धता जारी करने के समय कार्यवाहक कुलपति पीके मिश्रा पदस्थ थे।
जब परीक्षा का समय आया तब तक भूपाल सिंह कुलपति बना दिए गए थे, जिन्हे पहले इस मामले की कमजोरियों से अंजान रखा गया और जब सामने आई तो कुलपति ने गड़बड़ियां रोकने तत्काल प्रभाव से परीक्षाएं रोक दीं। लेकिन इस फैसले को दरकिनार कर सारी गड़बड़ी का ठीकरा कुलपति श्री सिंह के सिर पर फोड़ा जा रहा है।
परीक्षाएं होंगी तय
दोनो परीक्षाएं गत अप्रैल से जांच प्रक्रिया में उलझी हैं। जांच रिपोर्ट में अनुशंसा की गई है कि इन पाठ्यक्रमों के सत्र 07-08 के छात्रों की पात्रता और संबंधित कॉलेजों की संबद्धता की जांच करवाकर परीक्षा आयोजित करवाई जाए। इसी आधार पर माना जा रहा है कि कार्यपरिषद प्रवेश-पत्रों की जांच प्रक्रिया तय कर परीक्षा की तिथि घोषित करेगी।
मान्यता प्राप्त कालेजों की होगी परीक्षा
विवि के अधिकारी एनसीटीई से मान्यता प्राप्त सभी 17 कॉलेजों को परीक्षा में शामिल करने की तैयारी कर रहे हैं। जबकि उच्च शिक्षा सचिव द्वारा की गई जांच में सामने आया है कि आठ कॉलेजों को राज्य शासन ने सत्र 07-08 के लिए अनुमति नहीं दी है और तीन को विवि ने संबद्धता नहीं दी है।
विवि ने ली विधिक राय
जांच रिपोर्ट को कार्यपरिषद की बैठक में रखा जाना है, लेकिन विवि ने इस रिपोर्ट पर विधिक राय मांगी है। विवि द्वारा विधिक राय लेने को विधि मामलों के जानकार सही बता रहे हैं। दरअसल एक कुलपति के खिलाफ उच्च शिक्षा आयुक्त और कुलसचिव स्तर के अधिकारी द्वारा जांच किए जाने पर सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि राजभवन की परंपरा पूर्व न्यायाधीशों से जांच करवाने की रही है। जाहिर है कार्यपरिषद के सदस्यों को अब एक रिपोर्ट पर दी गई दो विधिक सलाहों पर चर्चा करके बीच का रास्ता निकाला होगा।