सूरत.
दिल में कुछ कर गुजरने की जिद हो और उसे अंजाम तक पहुंचाने का जज्बा तो इसके आगे किसी भी प्रकार की अक्षमता बौनी हो जाती है। वलसाड़ के नेशनल एसोसिएशन फॉर ब्लाइंड स्कूल के 20 विद्यार्थियों ने पिछले छह साल से आर्केस्ट्रा चलाकर यही साबित किया है।
इनकी काबिलियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब यह समूह संगीत प्रस्तुति देता है तो इसके सदस्यों की दृष्टिहीनता का आभास तक नहीं होता। बैंजो, ड्रम, हारमोनियम, बांसुरी, इलेक्ट्रॉनिक की-बोर्ड, तबला और ढोलक पर इनके सधे हाथ श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देते हैं।
आर्थिक मदद : आर्केस्ट्रा से होने वाली आय से समूह के कुछ सदस्यों को हॉस्टल व स्कूल फीस का खर्च उठाने में मदद मिली है। इलेक्ट्रॉनिक की-बोर्ड चलाने वाले चेतन पटेल ने बताया, ‘गरीबी के कारण पहले हॉस्टल और स्कूल फीस का खर्च उठाना मुश्किल होता था, लेकिन ऑर्केस्ट्रा का सदस्य बनने के बाद से मैं हर माह करीब 1,500 रुपए कमा लेता हूं, जिससे काफी राहत मिली है।’
बदलती जिंदगी : स्कूल के साधारण सचिव राम पटेल ने बताया कि स्कूल की ओर से करीब 32 दृष्टिहीन विद्यार्थियों की मदद की गई है। इनमें से कई सरकारी और निजी स्कूलों में संगीत अध्यापक भी हैं। उन्होंने बताया कि स्कूल के 215 में से 65 विद्यार्थियों को संगीत सिखाया जा रहा है, ताकि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।
सबका हित
आर्केस्ट्रा के एक सदस्य ने बताया कि उन्हें महीने में चार-पांच कार्यक्रम करने का मौका मिल जाता है। वहीं, आयोजन के हिसाब से प्रति कार्यक्रम 1,100 से पांच हजार रुपए की कमाई होती है, जिसका एक अंश वे स्कूल की सुविधाओं के लिए दे देते हैं।