भोपाल.
भोपाल जिले में सूखे के आसार बनने लगे हैं और किसानों के चेहरों पर परेशानी की लकीरें उभर आई हैं। आने वाले एक सप्ताह में यदि बारिश नहीं होती है तो खरीफ की मुख्य फसल सोयाबीन चौपट हो जाएगी और रबी की फसल पर भी इसका विपरीत प्रभाव पड़ेगा। स्थिति यह है कि अब तक जिले में पिछले साल की तुलना में 130.4 मिलीमीटर कम बारिश हुई है।
जिले में खरीफ की फसल के लिए कृषि विभाग ने कुल रकबा 99570 हेक्टेयर निर्धारित किया था। अच्छी बारिश की आस में किसानों ने 93750 हेक्टेयर भूमि में सोयाबीन की फसल लगाई। लेकिन अल्प वर्षा की वजह से फसल सूख रही है।
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिले के किसानों से जो जानकारी मिल रही है उसके अनुसार इस समय सोयाबीन की फली में दाने आ रहे हैं। यदि तीन दिन में बारिश नहीं होती है तो यह फसल चौपट हो जाएगी और सूखे के आसार बन जाएंगे।
बारिश और फसल की स्थिति
गत वर्ष जिले में खरीफ के लिए 97 हजार हेक्टेयर भूमि पर फसलें लगाई गई थीं। जिसमें 89 हजार हेक्टेयर में सोयाबीन बोया गया था। पिछले साल 5 सितंबर तक 663.6 मिली मीटर बारिश हुई थी। उस साल लगभग 98 हजार क्विंटल सोयाबीन प्राप्त हुआ था। जो सामान्य उत्पादन था।
इस बार सोयाबीन की फसल खतरनाक मोड़ पर है। तीन दिन में बारिश नहीं होने पर जिले की लगभग 40 प्रतिशत हल्की भूमि पर लगी फसल पूरी तरह से चौपट हो जाएगी और शेष पर 60 प्रतिशत अधिक उपजाऊ जमीन पर लगी फसल का उत्पादन आधा से कम रह जाएगा। इस वर्ष 5 सितंबर तक मात्र 533.2 मिलीमीटर बारिश हुई है।
किसानों की गुहार शुरू
फंदा विकास खंड ग्राम नांदनी के किसान शुक्रवार को कलेक्टर मनीष रस्तोगी के पास मदद की गुहार लगाने आए। किसानों का कहना है कि उनके यहां सूखे की स्थिति निर्मित हो रही है। कलेक्टर के निर्देश पर उपसंचालक कृषि वीके अग्रवाल ने क्षेत्र का दौरा किया, उन्हें स्थिति बिगड़ती हुई नजर आई।
बरकरार है उम्मीद मानसून की
बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बन रहा है। 8 सितंबर से ये सही रूप ले लेगा। उम्मीद है कि 9 या 10 सितंबर तक ये महाराष्ट्र से होकर गुजरात की ओर जाएगा और दक्षिण मप्र में भोपाल, होशंगाबाद, मंडला से लेकर इंदौर, खंडवा और खरगोन तक सामान्य वर्षा होगी।
-डा. डीपी दुबे, डायरेक्टर, मौसम विभाग
दक्षिण-पूर्व मानसून से हालांकि वर्षा कम हुई है, लेकिन सेटेलाइट इमेज के अनुसार दक्षिण-पश्चिमी मानसून से उम्मीद अभी बाकी है। दक्षिण-पूर्व मानसून से इस वर्ष देश की उत्तरी इलाकों में भारी वर्षा हुई। दक्षिण-पश्चिमी मानसून मप्र के दक्षिणी क्षेत्र को फायदा पहुंचाएगा।
-डा. जनार्दन नेगी, वरिष्ठ वैज्ञानिक
किसानों ने बोवनी में अधिक रुचि दिखाई थी इसलिए फसल की बोवनी का लक्ष्य पूरा कर लिया गया परंतु बारिश नहीं होने से उत्पादन प्रभावित होने के आसार बन गए हैं। कलेक्टर के निर्देश पर फसलों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
-वीके अग्रवाल, उपसंचालक कृषि विभाग