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कपास की कीमतों में मंदी के आसार नहीं

इंदौर. आगे चुनाव को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने किसानों को खुश करने के लिए साल 2008-09 के लिए मीडियम और लांग स्टेपल कॉटन के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में करीब 40 फीसदी बढ़ोतरी कर दी है जिससे आने वाले सालों में कपास उत्पादन में वृद्धि की संभावना है वहीं किसान भी इस निर्णय से काफी खुश हैं क्योंकि उनको उनकी उपज का अच्छा मूल्य मिलेगा।

इससे सबसे ज्यादा नुकसान टेक्सटाइल्स उद्योगों को होगा। इतने महंगे भावों पर कपास खरीदेंगे तो उनके उत्पादों की लागत भी बढ़ जाएगी। वहीं सूती कपड़ों की कीमतें भी बढ़ना तय है। दूसरी ओर इस बार उत्पादन कम हो या ज्यादा यह तय हो गया है कि कपास की कीमतों में अब मंदी के आसार कम हैं। कीमतें ऊंची होने से निर्यात कामकाज भी प्रभावित हो सकता है। देश में इस बार कपास का उत्पादन 3.25 करोड़ गांठ होने की संभावना है जो पिछली बार से ज्यादा है।

दूसरी ओर अमेरिका में उत्पादन घटने के कारण चालू साल वैश्विक स्तर पर कपास की पैदावार करीब 6 फीसदी घटने के साथ ही 2.47 करोड़ टन रहने के आसार हैं। अमेरिका में उत्पादन में 12 लाख टन की कमी के कारण वैश्विक उत्पादन पर असर पड़ेगा।

उत्तरभारत में इस बार कपास का रकबा घटने के बावजूद बंपर उत्पादन की संभावना है। सूत्रों के अनुसार पंजाब में 25 लाख गांठ, हरियाणा में 18 लाख गांठ और राजस्थान में 7.5 लाख गांठ कपास उत्पादन की संभावना है। पंजाब में कपास की शुरुआती फसल निकल रही है उसकी औसत उपज 25 मन (1 मन=४क् किलो) प्रति एकड़ आ रही है।

ऑस्ट्रेलिया में बढ़ेगा कपास का उत्पादन
पानी की बेहतर उपलब्धता के कारण ऑस्ट्रेलिया के कॉटन उत्पादन में इस साल बढ़ोतरी की संभावना है। ऑस्ट्रेलिया में कॉटन की बोवनी अगले महीने से शुरू होने की संभावना है। यहां उत्पादन 10 लाख गांठ तक जा सकता है। ऑस्ट्रेलिया का कॉटन उत्पादन पिछले कई साल से लगातार घट रहा है। पिछले साल यहां 1.26 लाख टन कॉटन पैदा हुई थी जो 2000-2001 के 8.19 टन के उत्पादन से 85 फीसदी कम थी।





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