इंदौर.
कलाकार की कला कहीं भी स्वरूप ले लेती है। चाहे वह पत्थर, माटी हो या रेत। शहर में भी एक कलाकार ऐसा है जिसने पूजा के उपयोग में आने वाली सुपारियों पर दो हजार से अधिक आकृतियां उकेर दी।
अग्रसेननगर के व्यवसायी मनीष झंवर ने सुपारियों पर 400 से अधिक गणोश की आकृतियों के साथ ही भगवान शिव, जीसस क्राइस्ट, हनुमानजी, भगवान बालाजी के साथ ही गांधीजी भी बनाए हैं। उन्होंने अपनी कला की शुरुआत खजराना गणोश से 10 साल पहले मिली पूजा की सुपारी से की। उन्होंने उस सुपारी पर गणोशजी की पहली आकृति उकेरी और उसके बाद एक-एक कर सुपारियों पर बनाई विभिन्न आकृतियां अब दो हजार का आंकड़ा पार कर चुकी हैं।
अग्रसेननगर निवासी मनीष कहते हैं अब तक जितनी भी आकृतियां बनाई हैं उनमें सबसे अधिक गणोश आकृतियां हैं। सबसे बड़ी खासियत यह है कि सभी भिन्न-भिन्न स्वरूप में है। इसके अलावा उन्होंने हर धर्म के भगवान और चिह्न को आकृति के स्वरूप में ढाला है। वे कहते हैं एक आकृति बनाने में उन्हें सात से आठ घंटे लगते हैं। अपनी इस कला के लिए उनका नाम लिम्का बुक रिकार्ड में भी दर्ज है।
शिवजी को बैठाया अलग-अलग वाहनों पर : मनीष ने शिवजी को भी अलग-अलग स्वरूप में ढाला है। उन्होंने शिवजी को हवाई जहाज, ट्रैक्टर, रोड रोलर, कार, जीप, हाथी, घोड़े के साथ साइकिल पर बैठाकर भी सवारी कराई है। वे कहते हैं लोगों से ऐसे काम के लिए उन्हें काफी सराहना भी मिली है। अपनी कला के लिए प्रशंसा पाना ही मेरे लिए सबसे बड़ा तोहफा है। इन बनाई हुई आकृतियों को कभी बेचा भी नहीं क्योंकि कला का कोई मूल्य नहीं होता।
मुश्किल भी आती है : मनीष बताते है कई बार कुछ विशेष आकृतियां बनाना उनके लिए बड़ा कठिन हुआ लेकिन भगवान गणोश के नाम के साथ ही अपनी इच्छाशक्ति के बलबूते पर उन्होंने इसे पूरा किया। एक बार ताजमहल बनाने के लिए 150 बार प्रयास किया तब जाकर वे 151वीं बार में उसे पूरा कर पाए। आकृतियों को सुरक्षित रखने के लिए वे उन पर वार्निश भी करते हैं।