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आंखों के बिना भी मुकाम हासिल किया

जयपुर. एक चींटी दीवार पर चढ़ रही है, लेकिन बार-बार गिर रही है। फिर चढ़ने का प्रयास करती है, फिर गिरती है, फिर प्रयास करती है। इस तरह 99 बार गिरने के बाद भी वह 100वीं बार चढ़ने का प्रयास करती है, और आखिर उसे सफलता मिल जाती है। सफलता भी गगनचुंबी।

नेत्रहीन आसिफ इकबाल का जीवन कुछ ऐसा ही है। न केवल नेत्रहीनों के लिए, बल्कि हर व्यक्ति के लिए जबरदस्त प्रेरणा के स्रोत कोलकाता निवासी आसिफ शुक्रवार को जयपुर में थे। धर्म सज्जन ट्रस्ट ने आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान के साथ मिलकर महाराणा प्रताप सभागार में शहरवासियों के लिए आसिफ से मुलाकात का कार्यक्रम आयोजित किया।

विषय था ‘कौन कहता है लक्ष्य प्राप्ति के लिए आंखों का होना जरूरी है।’ आसिफ ने स्वयं लैपटॉप ऑपरेट करते हुए अपने संघर्ष की कहानी को कभी शब्दों से तो कभी विजुअल शो के जरिए जयपुरवासियों के समक्ष प्रस्तुत किया। भावुक आसिफ ने कहा, जहां चाह वहां राह। शायद इसी लक्ष्य से जीवन में सफलता मिलती गई। बाद में श्रोताओं में से कइयों ने सवाल पूछे, जिनका उन्होंने उत्तर दिया।

इस मौके पर ट्रस्ट के अध्यक्ष सहित अनेक पदाधिकारी मौजूद थे। शुरू में पूर्व प्रशासनिक अधिकारी एम.एल. मेहता ने आसिफ इकबाल का स्वागत किया।





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