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आठवीं योजनाकाल के स्वीकृत पद खाली

ग्वालियर. 31 मार्च 97 को समाप्त आठवीं पंचवर्षीय योजनाकाल में विश्वविद्यालय में शिक्षकों के स्वीकृत पद 141 थे जिनमें से 77 खाली थे। शासन से पद भरने की अनुमति मिलते ही विश्वविद्यालय ने इसका विज्ञापन जारी किया लेकिन किन्हीं कारणों से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।

इसी तरह नौवीं पंचवर्षीय योजना में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने विभिन्न पाठच्यक्रमों के पांच शिक्षकों के पद की स्वीकृति दी और पांच साल तक उनके वेतनमान के लिए 54 लाख 95 हजार रुपए दिए। मप्र शासन से पद भरने की स्वीकृति न मिलने के कारण पद नहीं भरे जा सके।

लैप्स हो चुके हैं दो करोड़ रुपए
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 31 मार्च 07 को समाप्त हुई 10वीं पंचवर्षीय योजना के तहत जीविवि में विभिन्न पाठच्यक्रमों में 22 शिक्षकों की भर्ती की स्वीकृति दी। पांच साल तक उनके वेतन भत्तों के लिए एक करोड़ 76 लाख रुपए का अनुदान भी जारी किया लेकिन मप्र शासन ने पद भरने की सहमति नहीं दी लिहाजा 31 मार्च 07 को यूजीसी द्वारा जारी अनुदान की राशि की राशि के साथ ही पद भी लेप्स हो गए हैं।

शासन को वचनबद्धता ही देना है
नियमों के तहत रिक्त पदों को भरने और उनका वित्तीय भार वहन करने की वचनबद्धता मप्र शासन को देना होती है। जीवाजी विश्वविद्यालय प्रशासन, स्ववित्तीय पाठ्यक्रमों की आय से शिक्षकों के वेतन भतों का वित्तीय भार वहन करने का जिम्मा उठाने को तैयार है। पत्रों के जरिए शासन को भी कई बार अवगत कराया जा चुका है लेकिन शासन पद भरने की सहमति भर देने को तैयार नहीं है।

शिक्षकों के अन्य दायित्व
स्थायी शिक्षकों को अध्यापन कार्य के अलावा कालेजों का निरीक्षण, विभिन्न जांच समितियों, पेपर सेटिंग, आरडीसी, ईसी, महासभा आदि में शामिल किया जाता है। इसके चलते वे अध्यापन अथवा शोधकार्यो के लिए पर्याप्त समय नहीं दे पाते।

अधिकारियों का भी टोटा
विश्वविद्यालय में न केवल स्थायी शिक्षकों का टोटा है बल्कि अधिकारियों की संख्या भी कम होती जा रही है। गत रोज दो सहायक कुलसचिवों के तबादले के बाद विश्वविद्यालय में इस वर्ग के स्वीकृत पांच पदों में से केवल एक पद ही भरा है।

रिक्त पदों को भरने से आने वाला वित्तीय भार विवि प्रशासन वहन करने को तैयार है। पत्रों के माध्यम से शासन को इससे समय-समय पर अवगत कराया जाता रहा है लेकिन शासन से पद भरने की अनुमति नहीं मिल रही है।
- डॉ. डीएस चंदेल, कुलसचिव





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