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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष धनेंद्र साहू और कार्यकारी अध्यक्ष सत्यनारायण शर्मा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह और उनकी सरकार ने लोकायोग को झूठी जानकारी दी है। ऐसा करके वे लोकायोग से बच गए। इस गलतबयानी के लिए मुख्यमंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।
श्री साहू और श्री शर्मा ने कांग्रेस भवन में प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि कांग्रेस प्रवक्ता राजेश बिस्सा ने डा. सिंह के अलावा पीडब्लूडी राज्यमंत्री राजेश मूणत, पूर्व मुख्य सचिव शिवराज सिंह, वर्तमान मुख्य सचिव पी. जाय उम्मेन, आईएफएस अनिल राय और अन्य के खिलाफ लोक आयोग में तीन-तीन अलग मामले दर्ज कराए। मामला कुछ ऐसा है कि सीआईडीसी (छत्तीसगढ़ अधोसंरचना विकास निगम) ने बिना टेंडर आईआईडीसी नामक कंपनी को तकनीकी सलाहकार बना लिया।
अनुबंध के तहत कंपनी को सलाहकार के रूप में एक करोड़ 50 लाख रुपए और सक्सेस फीस के रूप में एक करोड़ 70 लाख रुपए प्राप्त होंगे। बिना टेंडर अनुबंध करना गैरकानूनी है, इसलिए लोकायोग से शिकायत की गई थी।
लोकायोग की नोटिस पर सरकार ने जवाब दिया कि उस समय राज्य नया था। तब सलाहकार नियुक्त करने के लिए कोई निविदा पद्धति प्रचलन में नहीं थी। यह पहला मामला था। सरकार ने उस समय की परिस्थितियों में नियम शर्र्तो के मुताबिक अनुबंध किया था।
लोकायोग ने इस आधार पर सरकार को बरी कर दिया। बाद में राजेश बिस्सा ने सूचना के अधिकार सीआईडीसी से जानकारी जुटाई तो उन्हें बताया गया कि सीआईडीसी में वर्ष 2001 से ही सलाहकार नियुक्त करने के लिए निविदा हो रही है। सूचना के अधिकार के तहत जानकारी दी गई कि वह सरकार का पहला मामला नहीं था।
इससे पहले भी अनुबंध की परंपरा रही है। इस संबंध में मुख्यमंत्री ने भी कहा था कि उन्होंने नियम प्रक्रिया के सही होने की तसल्ली कर लेने के बाद ही अनुमति दी थी। श्री साहू और श्री शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री खुद ही गलतबयानी कर रहे हैं। वे चाहते तो एक बाबू से पूछकर नियम प्रक्रिया की जानकारी ले सकते थे कि बिना निविदा के किसी को सलाहकार नियुक्त नहीं किया जा सकता। पूर्ववर्ती सरकार में निविदा से ही सलाहकार नियुक्त किए गए थे। दोनों नेताओं ने लोक आयोग के फैसले का सम्मान करने की बात कही। साथ ही यह भी कहा कि इस मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
कोई गलत जवाब नहीं : रमन
मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि लोक आयोग में गलतबयानी का आरोप हास्यास्पद है। उन्होंने कहा कि लोक आयोग को दिया गया जवाब अक्षरश: सही है। जवाब सही होने के कारण ही लोकायोग ने शिकायतकर्ता के आरोप को बेबुनियाद पाया और याचिका खारिज कर दी।
डा. सिंह ने कांग्रेस नेताओं की इस बात पर निंदा की कि जिस प्रकरण पर न्यायालय में विचार चल रहा है। कांग्रेस नेताओं की यह प्रवृत्ति संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को प्रभावित करने का कुत्सित प्रयास है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें न्यायिक संस्थाओं पर पूरा विश्वास है।