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शिक्षाकर्मी भर्ती में गोलमाल

रायपुर. राजधानी से 130 किमी दूर मैनपुर ब्लाक में डेढ़ साल पहले हुई शिक्षाकर्मी भर्ती में बड़ा गोलमाल उजागर हुआ है। इससे पंचायत और शिक्षा विभाग में हलचल मच गई है।

2006-07 में ब्लाक के स्कूलों में 178 शिक्षाकर्मियों की भर्ती को मंजूरी दी गई थी। इतने तो भर्ती हुए ही, पंचायत और शिक्षा अफसरों ने मिलकर 47 अतिरिक्त शिक्षाकर्मी भर्ती कर दिए। प्रारंभिक जांच के दौरान इस मामले में लेनदेन के संकेत भी मिले हैं।

रायपुर जिला पंचायत के सीईओ आईएएस अमित कटारिया ने इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं। पंचायत और शिक्षा अफसरों को ही इस काम में लगाया गया है। शुरुआती तहकीकात में कई हैरतअंगेज बातें सामने आई हैं। अंदेशा है कि बड़े रैकेट ने यह कारनामा अंजाम दिया। इसमें पंचायत और शिक्षा विभाग के कुछ अफसरों की लिप्तता के संकेत मिले हैं।

सूत्रों ने बताया कि जिन 47 लोगों को शिक्षाकर्मी बनाया गया, सभी पहली सूची जारी होने के बाद वेटिंग लिस्ट में रखे गए थे। पहले 178 पद भरे गए, फिर एक-एक कर वेटिंग वालों को पदस्थापना दी जाती रही। प्रक्रिया विकासखंड मुख्यालय से पूरी की गई। कारनामा इतनी सफाई से किया गया कि मुख्यालय के अफसरों को भनक तक नहीं लगी। यही वजह है कि फर्जी नियुक्ति पाने वालों को भी नियमित वेतन मिलने लगा। सारे लोग अभी नौकरी में हैं।

राज्यपाल का फर्जी प्रमाणपत्र : पहले मंजूर 178 पदों पर हुई भर्ती भी जांच के दायरे में है। बताते हैं कि जितने लोग भर्ती हुए, उनमें से 80 फीसदी के प्रमाणपत्र फर्जी हैं। इन्होंने स्काउट गाइड के प्रमाणपत्र पेश किए हैं। सभी में राज्यपाल के दस्तखत हैं। इन प्रमाणपत्रों के नंबर प्राप्तांक में जोड़े गए हैं। आधे से ज्यादा प्रमाणपत्र 1992 से 2004 के बीच 12 सालों के हैं।

दिलचस्प बात ये है कि राज्यपाल के सभी दस्तखत एक जैसे हैं। छत्तीसगढ़ और अविभाजित मध्यप्रदेश में उक्त अवधि में कोई भी राज्यपाल 12 साल नहीं रहे। यही नहीं, खेलकूद के ज्यादातर सर्टीफिकेट भी एक जैसे हैं। इनमें एक ही अफसर के दस्तखत हैं, केवल वर्ष का अंतर है। अनुभव प्रमाणपत्र जनभागीदारी द्वारा संचालित प्राइमरी स्कूलों के हैं जबकि जनभागीदारी से प्राइमरी स्कूल का संचालन ही नहीं होता।

कैसे फूटा फर्जीवाड़ा : मैनपुर ब्लाक में शिक्षाकर्मी भर्ती अरसे से विवादों में है। ज्यादातर नौकरी ब्लाक के ग्राम अमलीपदर, भेजीपदर और बोहरापदर के लोगों को दी गई। इसे लेकर वहां हंगामा भी हुआ लेकिन रायपुर तक बात नहीं आई। बाद में कुछ लोगों ने मुख्यालय में शिकायत की। जब लगातार शिकायतें मिलने लगीं, तब अफसरों के कान खड़े हुए। श्री कटारिया ने जिला पंचायत में पदभार संभालने के फौरन बाद मामले की जांच के आदेश दिए। शुरू में केवल फर्जी प्रमाणपत्र जांचे जा रहे थे। जांच में ही पता चला कि मंजूर पदों से ज्यादा को नौकरी दी गई।

7 शिक्षाकर्मी बर्खास्त : जिला पंचायत ने अभनपुर ब्लाक के 7 शिक्षाकर्मियों को बर्खास्त कर दिया है। पीतांबर लोधी, भोलाराम साहू, तिजऊराम तारक, जितेंद्र जाट, परमेंद्र कुमार और तीजन डहरिया ने अनुभव, खेल और बीएड का फर्जी प्रमाणपत्र पेश करके नौकरी हासिल की थी। बताते हैं कि इनमें ज्यादातर ने 1990-92 के बीच हायर सेकेंडरी की परीक्षा पास की लेकिन दस साल बाद (2001) का खेलकूद प्रमाणपत्र पेश किया। ग्रेजुएशन 1995-96 में किया लेकिन बीएड का प्रमाणपत्र 1994 का है।

जांच में कई गड़बड़ियां सामने आई हैं। इसमें कुछ अफसर-कर्मचारियों की लिप्तता का शक है। इन्हें बख्शा नहीं जाएगा। पूरी भर्ती निरस्त की जा सकती है।
-अमित कटारिया, सीईओ, जिला पंचायत रायपुर





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