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भारत एटमी ताकत, एनएसजी की मुहर

वियना.NDeal भारत और अमेरिका के बीच हुए असैन्य परमाणु समझौते पर एनएसजी के सदस्य देशों ने अपनी सहमति प्रदान कर दी है। इस तरह से समझौते को लकर चल रहीं एक बड़ी बाधा पार हो गई है।

लंबे संघर्ष और मसौदे में दो बार फेरबदल के बाद शनिवार को अंतत: परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों के समूह (एनएसजी) ने भारत को परमाणु व्यापार की छूट देने पर सहमति दे दी। इससे न सिर्फ भारत के लिए 34 साल की पाबंदी के बाद एटमी सौदों का दरवाजा खुल गया है, बल्कि अमेरिका के साथ करार को अमल में लाने की एक और बाधा दूर हो गई है।

बिना शर्त मिली मंजूरी

एनएसजी के 45 देशों के समूह ने भारत की परमाणु नीति पर विश्वास जताते हुए भारत और अमेरिका के बीच हुए असैन्य परमाणु समझौते को अपनी सहमति बिना किसी दबाव और बिना किसी शर्त के मंजूरी दे दी है।

चीन भी राजी :

अब तक सकारात्मक रुख रखता आ रहा चीन भी शुक्रवार देर रात यह कहकर इन असंतुष्ट देशों के साथ आ गया कि अमेरिका जिस जल्दबाजी में मंजूरी पर जोर दे रहा है, वह उसे मंजूर नहीं है। चीन का विरोध इतना गंभीर था कि अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश को चीन का समर्थन हासिल करने के लिए राष्ट्रपति हू जिंताओ से फोन पर आग्रह करना पड़ा। शुक्रवार को पांच दौर की बातचीत के बाद शनिवार को भी अनौपचारिक चर्चाओं का दौर चला। एनएसजी में सहमति होने के बाद शनिवार को चीन ने विरोध नहीं किया, लेकिन कुछ विशिष्ट मुद्दों को लेकर सवाल जरूर उठाए।

परदे के पीछे मिली जीत :

अनौपचारिक बैठक में परदे के पीछे हुई राजनयिक गतिविधियों में भारत की जीत हुई, जिसमें अमेरिका ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अंतिम दौर में भारत को छूट देने न देने की बहस विभिन्न देशों के राष्ट्र प्रमुखों के बीच फोन चर्चा तक सीमित हो गई थी।

एक बाधा और :

मंजूरी से पहले भारत एनएसजी से सुरक्षा उपायों पर समझौता कर ही चुका है। अब सितंबर अंत में सत्र समाप्ति के पूर्व अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी लेने के साथ ही भारत-अमेरिका परमाणु करार अमल में आ जाएगा।

ऐतिहासिक कामयाबी

यह परमाणु प्रौद्योगिकी की मुख्यधारा से दशकों के अलगाव की समाप्ति है। यह भारत के परमाणु अप्रसार के बेदाग रिकॉर्ड को अंतरराष्ट्रीय मान्यता है।

-मनमोहन सिंह, प्रधानमंत्री

भारत की ऊर्जा जरूरतें पूरी करने और स्वच्छ ऊर्जा मुहैया कराने की वैश्विक चुनौती की दिशा में यह निर्णायक क्षण है। प्रणव मुखर्जी के बयान से बात बनी।

-जॉन रूड, अमेरिकी विदेश उपमंत्री (शस्त्र नियंत्रण)।





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