Manoranjan
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जी, ईशा कोप्पिकर के इस बयान को ग़लत मत समझिएगा। वो तो अपने रोल्स की वैरायटी की बात कर रही हैं। ईशा के मुताबिक़ वह हर तरह के रोल कर सकती हैं, फिर चाहे कॉमेडी हो या सीरियस या फिर ग्रे शेड ही क्यों न हों!..
बरी’ में आपके अलग लुक और रोल की काफ़ी चर्चा हो रही है। कैसा लुक है?
इसमें वाक़ई मेरा लुक और रोल बिल्कुल अलग है। इसमें मैं झोपड़पट्टी में आटा-चक्की चलाने वाली लड़की बनी हूं। मुझे काली और बदसूरत दिखाया गया है। बिल्कुल नॉन-ग्लैमरस रोल है यह। ख़ूबसूरत लड़की को बदसूरत दिखाना एक बड़ी चुनौती होती है, इसके लिए मेरे मेकअप मैन, हेयर ड्रैसर और ड्रैस डिज़ाइनर को ख़ास मेहनत करनी पड़ी। मेरी सफ़ेद सूती धोतियां चाय के पानी में उबाली जाती थीं, ताकि वे गंदी लगें। पूरी शूटिंग के दौरान मैंने बालों में कंघा नहीं लगने दिया। मेरी चोटी हाथ से गूंथी जाती थी, ताकि एकदम असली झोपड़पट्टी वाली दिखूं। यही लड़की शबरी बाद में डांसर और डॉन बनती है, जिससे सब थर्राते हैं। एक कैरेक्टर में इतना ट्रांसफॉर्मेशन बहुत कम देखने को मिलता है।
इतने चैलेंजिंग रोल के लिए रामगोपाल वर्मा ने आपको किस आधार पर चुना?
वह तो असमंजस में थे कि मैं यह रोल कर पाऊंगी या नहीं। पहली मीटिंग में उन्होंने मुझे रिजैक्ट भी कर दिया था। उनका कहना था कि तुम इतनी ख़ूबसूरत हो, तुमको भला बदसूरत दिखाया कैसे जा सकता है! लेकिन इस फिल्म के डायरैक्टर ललित मराठे को मुझ पर पूरा भरोसा था और उनके ही भरोसे के आधार पर मुझे लिया गया। बाद में दो-तीन दिन की शूटिंग के बाद रामूजी ने रशेज देखे, तो वह दंग रह गए और ललित के फ़ैसले पर बहुत ख़ुश हुए।
यह फिल्म कब रिलीÊा होगी?
यह तो नवंबर में रिलीÊा होगी, लेकिन अगले महीने से तक़रीबन हर महीने मेरी 1-2 फिल्में रिलीज़ होंगी। यह सिलसिला साल के अंत तक चलेगा। मेरी ‘राइट या रांग’, ‘हैलो’, ‘हर पल’, ‘हैलो डार्लिग’, ‘शबरी’ और ‘एक विवाह ऐसा भी’ अगले 4 महीनों में रिलीÊा होंगी।
यानी आपकी फिल्मों का फैस्टिवल शुरू होने वाला है। लेकिन ‘डार्लिग’ के बाद साल भर का गैप क्यों आ गया? मेरी ‘राख’, ‘गहराई’ जैसी दो-तीन फिल्में अटक गईं। लगता है अब ये रिलीÊा हो भी नहीं पाएंगी। ये रिलीÊा न हों, वही अच्छा है। क्या होता है कि जब फिल्में समय पर रिलीÊा नहीं होतीं, तो कहानी बासी पड़ जाती है और दर्शकों को उनमें कोई रुचि ही नहीं रह जाती। बहरहाल, पिछली लॉट ख़त्म करने के बाद मैंने जो नई फिल्में साइन की थीं, वे अब जाकर पूरी हुई हैं और अब थोड़ा आगे-पीछे रिलीÊा होंगी।
पिछले एक-डेढ़ साल में 6 फिल्में..! शूटिंग के लिए बहुत समय देना पड़ा होगा?
मैंने 18-18 घंटे शूटिंग की। आउटडोर को तो छोड़िए, मुंबई में शूटिंग होने पर कई बार तीन-तीन दिन तक घर नहीं जा पाती थी। जब भी समय मिलता था, थोड़ा सो लेती थी और फिर कैमरे के सामने खड़ी हो जाती थी। थैंक गॉड कि मैं बीमार नहीं पड़ी।
इन दिनों कितने घंटे शूटिंग कर रही हैं?
इन दिनों शू¨टग कम और शूट की हुई फिल्मों की डबिंग Êयादा कर रही हूं। अब मैं दो-तीन महीने कोई फिल्म साइन नहीं करूंगी। सही भोजन और व्यायाम करके, पूरी नींद लेकर शरीर की उस ऊर्जा की भरपाई करूंगी, जो पिछले डेढ़-दो सालों में ख़र्च की है। इस दौरान मैं स्क्रिप्ट भी पढ़ती रहूंगी। इस व़क्त मेरे पास 12 नई स्क्रिप्ट्स आई हैं।
आपकी आने वाली फिल्मों में पहले जैसे सेकेंड हीरोइन वाले रोल ही हैं या किसी में सोलो हीरोइन भी हैं?
देखिए, अभी से मैं कुछ दावा करूं, तो ठीक नहीं होगा। लेकिन मुझे लगता है कि मेरी आने वाली फिल्में मेरे कैरियर का टर्निग प्वाइंट साबित होंगी। ‘राजश्री’ और ‘मुक्ता आर्ट्स’ जैसे प्रतिष्ठित बैनर्स की फिल्में मेरे पास हैं, जानू बरुआ जैसे एवॉर्ड विनिंग डायरैक्टर भी अपनी फिल्म के लिए मुझे याद करते हैं, ये मेरे कैरियर के अच्छे संकेत हैं। मैं कई फिल्मों में सोलो हीरोइन हूं, मगर मल्टी-हीरोइन फिल्मों में भी मेरा रोल वÊानदार है। जैसे कि जानू बरुआ की ‘हर पल’ में मेन हीरोइन प्रिटी ज़िंटा हैं, लेकिन मेरा रोल भी बहुत अहमियत रखता है।
ग्लैमरस हीरोइन होने के बावजूद आप बीच-बीच में ‘पिंजर’, ‘हर पल’ जैसी गंभीर फिल्में भी कर लेती हैं। क्या इसके पीछे एवॉर्ड का लालच है?
लालच है भी तो बुरा क्या है! लेकिन मैंने तो शुरू से ही वैरायटी रोल किए हैं। मैं यह साबित करना चाहती हूं कि मैं सब कुछ कर सकती हूं। मुझे लगता है कि या तो श्रीदेवी और काजोल ने वैरायटी दी या फिर वैसी वैरायटी मैं दे सकती हूं। मैंने ग्लैमरस-नॉन ग्लैमरस, डांस-एक्शन, नेगेटिव-पॉजिटिव.. सब कुछ किया है।
जानू बरुआ की ‘हर पल’ में प्रिटी ज़िंटा के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
हम दोनों ऐसी पक्की सहेली बन गई हैं, जैसे जन्मों-जन्मों से हम सहेलियां हों। उसकी एक वजह भी है। हमारा नेचर बहुत मिलता है। वह भी मुंहफट हैं और मैं भी मुंहफट हूं। वह भी साफ़ दिल की हैं और मैं भी। हम दोनों में इतना प्यार है कि वह कहती हैं, ‘ईशा, तेरी शादी के लिए लड़का मैं ढूंढ़कर दूंगी।’ वह मेरी ख़ूबसूरती की भी तारीफ़ करती रहती हैं। वह कहती थीं कि श्वेता के रोल के लिए मेरा चुनाव सर्वश्रेष्ठ है। दरअसल, फिल्म में श्वेता यानी मैं, प्रिटी की दोस्त हूं। मैं ख़ूबसूरत और फन-लविंग नेचर के कारण सबकी चहेती हूं, जिस कारण प्रिटी मुझसे जलती हैं।
‘राजश्री’ की ‘विवाह’ में अमृता राव थीं, जबकि आने वाली ‘एक विवाह ऐसा भी’ में आप हैं। क्या अमृता से अपनी तुलना के लिए तैयार हैं?
मुझे नहीं लगता कि तुलना होगी, क्योंकि ‘एक विवाह ऐसा भी’ अलग फिल्म है। ‘विवाह’ का सीक्वेल या रीमेक तो है नहीं। इसमें मैं चांदनी का रोल कर रही हूं, जो गर्ल नैक्स्ड डोर टाइप है। इसमें मेरी और सोनू सूद की जोड़ी है। दोनों सिंगर हैं। चांदनी अपनी पर्सनल लाइफ़ को प्रोफैशनल लाइफ़ से Êयादा महत्व देने वाली लड़की है, लेकिन परिस्थितिवश उसे पर्सनल लाइफ़ को नÊारअंदाज कर प्रोफैशनल लाइफ़ को प्राथमिकता देनी पड़ती है। इसमें भी ‘राजश्री’ की अन्य फिल्मों की तरह एक संदेश है। यह भी म्यूÊिाकल फिल्म है, जिसमें 9 गाने हैं।
आप एक फिल्म ‘हैलो डाíलंग’ भी कर रही हैं ना?
मैं ‘हैलो’ भी कर रही हूं और ‘हैलो डार्लिग’ भी। अतुल अग्निहोत्री की ‘हैलो’ में एक कॉल सैंटर की एक रात की कहानी है। इसमें मैं मॉडल ईशा सिंह बनी हूं। इसमें सलमान ख़ान और कैटरीना कैफ़ गैस्ट अपीयरैंस में हैं। ‘मुक्ता आर्ट्स’ की ‘हैलो डार्लिग’ में मैं पानीपत से मुंबई आई लड़की सतपती चौटाला बनी हूं। यह मुंबई आकर एक फैशन हाउस में काम करती है, जिसके बॉस सिरफिरे जावेद जाफ़री हैं। मैं ‘मुक्ता आर्ट्स’ की एक और फिल्म ‘राइट या रांग’ भी कर रही हूं। सनी देओल के साथ वाली यह फिल्म सस्पैंस-थ्रिलर है, जिसमें मैं सस्पीशियस लड़की के रोल में हूं। ये सभी फिल्में इसी साल आएंगी और हर रोल एक-दूसरे से बहुत अलग होगा।